- रिपोर्ट :सरफराज आलम
लखीसराय।लखीसराय फ़िल्म महोत्सव (03–05 दिसंबर 2025) की तैयारियाँ ज़ोरों से चल रही हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन को लेकर न सिर्फ़ बिहार, बल्कि देश और विदेश में भी उत्साह देखा जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुए भारत के अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव, गोवा (IFFI) में भी लखीसराय फ़िल्म महोत्सव की चर्चा विशेष रूप से सुर्खियों में रही।
महोत्सव के निदेशक सह ज़िलाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने बताया कि देशभर के फ़िल्म प्रेमियों और फ़िल्मकारों ने इसमें भाग लेने के लिए संपर्क साधा है। उन्होंने कहा कि “इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार, विशेषकर लखीसराय, में सिनेमा और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए अपार सम्भावनाएँ मौजूद हैं। आवश्यकता केवल निरंतर प्रयास की है।”
महोत्सव के संयोजक सह सिनेयात्रा के सचिव रविराज पटेल ने कहा कि फ़िल्म महोत्सव का सबसे बड़ा लाभ यह है कि दर्शक दुनिया भर की कला, संस्कृति, भाषाओं और विभिन्न कथाओं से परिचित होते हैं। उन्होंने बताया कि “फ़िल्में जीवन के संघर्ष, संवेदना और मानवीय कहानियों को समझने का अवसर देती हैं। इस वर्ष महोत्सव में ऐसी ही प्रेरक और पुरस्कृत फ़िल्मों का विशेष प्रदर्शन होगा।”
यह आयोजन भारत के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती—जिसे मेधा दिवस के रूप में मनाया जाता है—के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। साथ ही, इस वर्ष देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती तथा ‘वंदे मातरम’ गीत की 150वीं वर्षगांठ भी है। महोत्सव इन ऐतिहासिक अवसरों पर देश के महापुरुषों, उनकी विरासतों और सांस्कृतिक धरोहरों को सम्मान देने का संदेश भी देता है।
लखीसराय फ़िल्म महोत्सव 2025 स्थानीय दर्शकों के साथ-साथ देशभर के सिने-प्रेमियों का केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
