- रिपोर्ट: नीरज मित्तल
फरीदाबाद। सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। एक ओर जहां अस्पताल में लिफ्ट बंद होने को लेकर पहले ही विवाद की स्थिति बनी हुई थी, वहीं दूसरी ओर अस्पताल परिसर में चल रहे कार्यक्रम के बीच कई गर्भवती महिलाओं ने इलाज में देरी और लापरवाही के आरोप लगाए।
जानकारी के अनुसार, एक निजी अस्पताल और सिविल अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान महिलाओं को गर्भावस्था में बरती जाने वाली सावधानियों और देखभाल के बारे में जानकारी दी जा रही थी। हालांकि, कार्यक्रम के चलते कई मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी।
मौके पर मौजूद गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले गलत रिपोर्ट दी गई और जब वे दोबारा जांच व इलाज के लिए पहुंचीं तो अस्पताल स्टाफ कार्यक्रम में व्यस्त मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि मरीजों का इलाज अधिक जरूरी है या कार्यक्रम। परिजनों ने चिंता जताई कि यदि इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान होता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।
मीडिया से बातचीत के दौरान एक महिला अपनी समस्या बता ही रही थी कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर तुरंत अपने केबिन में लौटकर मरीजों को देखने लगीं। पीड़ित महिला और उसके पति ने मीडिया का धन्यवाद करते हुए कहा कि यदि मीडिया मौके पर नहीं होती, तो डॉक्टर कार्यक्रम में ही व्यस्त रहतीं।
इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का कहना है कि जागरूकता कार्यक्रम जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ-साथ उपचार व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
