नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (23 मार्च 2026) को लोकसभा में ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष को लेकर देश को सतर्क रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं और भारत को उसी तरह तैयार रहना होगा, जैसे कोरोना महामारी के दौरान मजबूती से हालात का सामना किया गया था।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ईरान से अब तक करीब 1,000 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं। भारतीय दूतावास प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मदद कर रहे हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
एलपीजी सप्लाई को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। ऐसे में सरकार घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
उन्होंने बताया कि देश की सभी सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से बातचीत की है और भारत शांति बहाली के लिए लगातार प्रयासरत है। उनका मानना है कि संवाद और कूटनीति ही इस संकट का समाधान है।
प्रधानमंत्री ने व्यावसायिक जहाजों पर हमलों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बाधा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है, क्योंकि ये वैश्विक व्यापार के लिए अहम हैं।
भारत ने ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
