भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पिछले दिसंबर से अब तक पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस बीमारी के केवल दो मामलों की ही पुष्टि हुई है। सरकार के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर देशभर में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
कई देशों में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग
निपाह वायरस के संभावित खतरे को देखते हुए बांग्लादेश, वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड सहित कई एशियाई देशों ने हवाईअड्डों पर यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक केरल और पश्चिम बंगाल दोनों ही निपाह वायरस के लिए एंडेमिक ज़ोन माने जाते हैं।
पश्चिम बंगाल में दो मामलों की पुष्टि
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन दोनों पुष्ट मामलों के संपर्क में आए कुल 196 लोगों की पहचान की गई थी। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने सभी की निगरानी और जांच कराई। राहत की बात यह है कि किसी भी व्यक्ति में निपाह वायरस के लक्षण नहीं पाए गए और सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
तमिलनाडु में भी बढ़ाई गई निगरानी
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में निपाह के दो मामलों की पुष्टि के बाद तमिलनाडु सरकार ने भी रोग निगरानी और अस्पतालों की तैयारियों को तेज कर दिया है। भारत सरकार की सलाह पर तमिलनाडु डायरेक्टरेट ऑफ पब्लिक हेल्थ (DPH) ने राज्य के सभी जिला, शहर और नगरपालिका स्वास्थ्य अधिकारियों को तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि बुखार से पीड़ित सभी मरीजों की विशेष निगरानी की जाए, खासकर उन लोगों की जिनकी हाल में पश्चिम बंगाल यात्रा रही हो या जो संक्रमित क्षेत्रों से आए व्यक्तियों के संपर्क में रहे हों।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा वायरल संक्रमण है, जिसकी मृत्यु दर कई अन्य सांस संबंधी बीमारियों से अधिक है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय पर रिपोर्टिंग और निगरानी से इसके प्रसार को रोका जा सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, दूषित फलों या सूअरों के नजदीकी संपर्क से फैल सकता है।
कितना खतरनाक है निपाह वायरस
निपाह एक जूनोटिक संक्रमण है, यानी यह जानवरों से इंसानों में और फिर इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति की लार, पेशाब और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। यह गंभीर सांस की बीमारी और दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) का कारण बन सकता है। फिलहाल निपाह वायरस के लिए कोई वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है।
निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण
निपाह वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड चार से 14 दिनों का होता है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, मतली, उल्टी और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं, जो आगे चलकर निमोनिया का रूप ले सकते हैं। गंभीर मामलों में यह दिमाग में खतरनाक सूजन पैदा करता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) निपाह वायरस को बेहद खतरनाक मानता है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है, जो कोविड-19 से कहीं अधिक है।
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