गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
करीब 37 साल पहले होली के दिन एक ऐसा मज़ाक हुआ, जिसने पूरे हरियाणा की राजनीति में हलचल मचा दी। होली के रंग में डूबी उस सुबह मैंने जनसत्ता में मज़ाकिया अंदाज़ में एक खबर लिख दी— “देवीलाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया और ओमप्रकाश चौटाला को नया मुख्यमंत्री बनाया गया।”
होली का दिन था, सोचा थोड़ा रंग खबरों में भी घोल दिया जाए। लेकिन यह खबर प्रदेश में जंगल की आग की तरह फैल गई। लोग हैरान-परेशान, नेता चौंक गए और अफसरों के बीच खलबली मच गई।
देवीलाल ने भी कर दी ‘पुष्टि’
उस दिन चौधरी Devi Lal तेजाखेड़ा फार्म हाउस में होली मना रहे थे। सिरसा के पत्रकार जब वहां पहुंचे और खबर के बारे में पूछा तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—“खबर ठीक है।”
पत्रकार हक्के-बक्के रह गए। तभी देवीलाल ने सस्पेंस खत्म करते हुए हंसकर कहा—
“बावली बूच, जनसत्ता वाले पवन बंसल ने होली का मजाक उड़ाया है।”
होली का मजाक था, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि खबर में लिखी कई बातें बाद में सच साबित हुईं। आगे चलकर Om Prakash Chautala वास्तव में मुख्यमंत्री बने।
अफसरशाही में भी मचा हड़कंप
खबर में यह भी लिखा गया था कि डीआईजी सीआईडी अजीत सिंह भटोटिया को हटाकर मोहिंदर सिंह मलिक की नियुक्ति कर दी गई है। साथ ही मंत्री डॉ. कृपा राम पूनिया को हाउस अरेस्ट किए जाने का जिक्र भी था।
मजेदार बात यह कि डॉ. पूनिया ने भी खबर को सच मान लिया। जब कुछ पत्रकार उनके घर पहुंचे और बाहर आने के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया—“मैं तो हाउस अरेस्ट हूं, आज जनसत्ता में पवन बंसल ने खबर लिखी है।”
रोहतक के तत्कालीन डीसी बलबीर सिंह ने तो चौटाला के मुख्यमंत्री बनने की खुशी में बाकायदा लड्डू भी बंटवा दिए।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं
मंत्री रघुबीर सिंह कादियान, जो रणजीत सिंह के समर्थक माने जाते थे, उस समय स्नान कर रहे थे। उनकी पत्नी ने उन्हें खबर पढ़कर सुनाई।
उधर Om Prakash Chautala उस दिन यमुनानगर में थे। खबर से वे खासे नाराज हुए। उन्होंने पत्रकारों से कहा—
“यह खबर मेरे विरोधियों के कहने पर लिखी गई है।”
होली का मजाक, जो इतिहास बन गया
होली की मस्ती में लिखी गई एक खबर ने उस दिन पूरे प्रदेश की राजनीति को रंगों से भर दिया। मजाक ऐसा कि नेताओं से लेकर अफसरों तक सब उसकी चपेट में आ गए।
समय के साथ वह घटना हरियाणा की राजनीतिक किस्सागोई का हिस्सा बन गई। सच और मजाक के बीच की वह पतली रेखा उस दिन साफ नजर आई—और यह भी साबित हुआ कि कभी-कभी होली का मजाक भी इतिहास का हिस्सा बन जाता है।
बुरा न मानो, होली है! 🎨
