नई दिल्ली: भारतीय सेना भविष्य में शामिल करेगी एडवांस ड्रोन — सीमा पर 24 घंटे निगरानी का लक्ष्य
भारतीय सेना 24 घंटे निगरानी के लिए अपनाएगी एडवांस ड्रोन — रक्षा रोडमैप की योजनारक्षा आधुनिकरण रोडमैप के तहत भारतीय सेना हाइब्रिड RPA और MALE श्रेणी के 120+ ड्रोन खरीदने पर विचार कर रही है — सीमा पर 24 घंटे निगरानी व लक्षित ऑपरेशन्स के लिए यह रणनीति तैयार।
नई दिल्ली। भारतीय सेना आने वाले कुछ वर्षों के भीतर युद्ध-योग्य और सर्विलांस के लिए अत्याधुनिक ड्रोन शामिल करने की योजना पर काम कर रही है। यह योजना 15 वर्षीय रक्षा आधुनिकरण रोडमैप के हिस्से के रूप में तैयार की गई है और इसका उद्देश्य सीमा-रक्षाबलों की भविष्य की तकनीकी जरूरतों को सुनिश्चित करना है।
क्या है योजना का मकसद?
रक्षा विभाग ने टेक्नोलॉजी पर्सपेक्टिव और कैपेबिलिटी रोडमैप में ड्रोन प्लेटफॉर्म की जरूरतों का खाका तैयार किया है, ताकि घरेलू रक्षा उद्योग को समय रहते आवश्यक अनुसंधान एवं उत्पादन की दिशा दी जा सके। इसके जरिए देश में ही हथियार-समर्थित और निगरानी क्षमता वाले ड्रोन विकसित करने पर बल दिया जा रहा है।
किस तरह के ड्रोन खरीदे जाएंगे?
सूत्रों के अनुसार तीनों सेनाओं के लिए विभिन्न श्रेणी के ड्रोन खरीदे जाने की संभावना है —
हाइब्रिड RPA (Remotely Piloted Aircraft): यह फिक्स्ड-विंग और रोटरी-विंग तकनीक को संयोजित करता है। हाइब्रिड RPA लगभग 20,000 फीट की ऊँचाई तक उड़ान भरने में सक्षम होते हैं और लंबी रेंज पर सर्विलांस दे सकते हैं। वायुसेना को फिलहाल करीब 10-20 हाइब्रिड RPA की आवश्यकता बताई जा रही है।
MALE (Medium Altitude Long Endurance) ड्रोन: ये प्लेटफॉर्म 30,000–40,000 फीट की ऊँचाई पर ऑपरेट कर सकते हैं और लगभग 24 घंटे या उससे अधिक लगातार निगरानी करने में सक्षम हैं। रिपोर्ट के अनुसार तीनों सेनाएँ मिलकर 120 से अधिक MALE श्रेणी के ड्रोन खरीदने पर विचार कर रही हैं।
इन ड्रोन से क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
सीमा पर निरंतर 24 घंटे निगरानी की क्षमता।
दुश्मन गतिविधियों, घुसपैठ और संदिग्ध मूवमेंट पर त्वरित पहचान और फील्ड कमांड को रीयल-टाइम सूचना।
लक्षित हमला (targeted strike) और ISR (Intelligence, Surveillance, Reconnaissance) में वृद्धि।
घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत कर निर्यात-समर्थ प्लेटफॉर्म का विकास।
क्यों जरूरी हैं ये ड्रोन?
आधुनिक युद्ध और सीमा सुरक्षा की बदलती आवश्यकताओं ने ड्रोन को निर्णायक उपकरण बना दिया है। पाकिस्तान व चीन जैसे सीमाओं पर सक्रिय चुनौतियों के संदर्भ में ये ड्रोन ऑप्टिकल/इंफ्रारेड सेंसर, राडार और कॉम्बैट पेलोड के साथ उपयोगी साबित होंगे। ड्रोन न केवल युद्ध-क्षमता बढ़ाएंगे बल्कि सुरक्षा बलों की तत्परता और जोखिम कम करने में भी मददगार होंगे।
SEO कीवर्ड्स (प्रमुख):
सीमित मेटा-टाइटल सुझाव:
सीमित मेटा-डिस्क्रिप्शन सुझाव: रक्षा आधुनिकरण रोडमैप के तहत भारतीय सेना हाइब्रिड RPA और MALE श्रेणी के 120+ ड्रोन खरीदने पर विचार कर रही है — सीमा पर 24 घंटे निगरानी व लक्षित ऑपरेशन्स के लिए यह रणनीति तैयार।
