नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद बदला रुख, भारत समेत 4 देशों की विशेषज्ञ टीमों को तकनीकी मदद की अनुमति

Kathmandu: हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने नेपाल में भारी तबाही मचा दी है। लगातार बढ़ती लापता लोगों की संख्या और विदेशी नागरिकों की तलाश को लेकर संबंधित देशों के दबाव के बीच नेपाल सरकार ने विदेशी विशेषज्ञ टीमों की मदद लेने का फैसला किया है। अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमों को चुनिंदा रेस्क्यू और पहचान संबंधी अभियानों में तकनीकी सहायता देने की अनुमति दी जाएगी।

नेपाल सरकार का यह निर्णय उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें काठमांडू ने कहा था कि सर्च और रेस्क्यू अभियान के लिए नेपाल अपने संसाधनों पर निर्भर रहेगा और विदेशी टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, अब नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि कुछ विशेष अभियानों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता की आवश्यकता है, जबकि सामान्य खोज एवं बचाव कार्यों के लिए नेपाल के पास पर्याप्त संसाधन हैं।

600 से ज्यादा मौतें, करीब 2 हजार लोग लापता

भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे आई फ्लैश फ्लड ने व्यापक तबाही मचाई है। शनिवार, 29 अगस्त 2026 की सुबह तक 600 से अधिक लोगों की मौत की सूचना है, जबकि आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं।

लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा चीन, अमेरिका, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।

टनल रेस्क्यू और डीएनए जांच में मिलेगी विदेशी मदद

एक अंतर-मंत्रालयी पैनल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से विशेषज्ञ सहायता लेने को मंजूरी दी है। विदेशी विशेषज्ञों को विशेष रूप से टनल रेस्क्यू, डीएनए विश्लेषण और फोरेंसिक पहचान जैसे कार्यों में लगाया जा सकता है।

सबसे बड़ी चिंता 216 मेगावाट के अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर है। परियोजना में काम करने वाले करीब 576 कर्मचारियों का अब तक पता नहीं चल पाया है। भूस्खलन से सड़कें क्षतिग्रस्त होने और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं।

भारत ने भेजी NDRF और मेडिकल टीम की पेशकश

भारत ने नेपाल को टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों, मेडिकल टीम और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भेजने की पेशकश की है। इसके साथ ही भारत की ओर से जनरेटर, भोजन, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और अन्य जरूरी राहत सामग्री भी भेजी गई है।

दक्षिण कोरिया भी अपने कई नागरिकों से संपर्क टूटने के बाद विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि विदेशी विशेषज्ञ मुख्य रूप से रसुवा और नुवाकोट की पनबिजली सुरंगों में चल रहे बचाव अभियानों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके अलावा डीएनए परीक्षण और मृतकों की पहचान में भी तकनीकी सहयोग दिया जाएगा।

दुर्गम इलाकों में हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू की तैयारी

नेपाल के अधिकारी निजी हेलीकॉप्टरों के इस्तेमाल की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि, पहाड़ी इलाकों की दुर्गमता और हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग के लिए सीमित स्थान के कारण राहत अभियान में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।

नेपाल सरकार का विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से प्रभावित दुर्गम इलाकों में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाना लगातार मुश्किल हो रहा है।

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