जीन्द की यादें: इंडियन एक्सप्रेस से पत्रकारिता की शुरुआत, गुरुग्राम में बसे कदम—पर आत्मा आज भी जीन्द में
गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
जीन्द की यादें ,जीन्द में जन्मा और यहीं से क़रीब पचास साल पहले इंडियन एक्सप्रेस के रिपोर्टर के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की। बेशक आज अन्याय, पाप और शोषण की नगरी गुरुग्राम में रहता हूँ, लेकिन आत्मा आज भी जीन्द में ही बसती है।
“वो काग़ज़ की किश्ती कोई लौटा दे बीते हुए दिन”—यह पंक्ति जीन्द की गलियों, तालाबों और चेहरों की याद दिला देती है।
रानी का तालाब हो या जयन्तीदेवी—आज भी सिर स्वतः झुक जाता है। पांडू पिंडारा की मान्यता समय के साथ और मजबूत हुई। पिशोरी लाल-भल्ले सुनार के गहनों की चमक और रामपत टिक्की वाले की खुशबू दूर-दूर तक मशहूर थी। बालू पंडित सबके लिए गुरु समान थे। लछमन के गोलगप्पे, बाबू राम अख़बार वाला, रामजी की कुल्फ़ी—ये सब जीन्द की पहचान थे। कुंदन और भारत सिनेमा, माँगे राम गुप्ता और बृज मोहन सिंगला, फिर हरी चंद मीड्डा और अब उनके बेटे कृष्ण मीड्डा—ये नाम शहर की स्मृतियों में दर्ज हैं।
जगत क्रांति अख़बार, हैप्पी नर्सरी और एस.डी. हाई स्कूल—शहर की बौद्धिक धड़कन थे। चुटकी वाले बाबा को चमत्कारी माना जाता था। झांझ गेट पर संत लाल की राजनीति और भगवान दास के ट्रक—शहर की रफ्तार बताते थे। भारत सिनेमा में टिकट के लिए अच्छे-अच्छे लोग हाथ मलते थे। राजनीति की उठा-पटक का सरदार भी जीन्द ही था। शहरनामा ने प्रतिभाओं को उकेरा—उसका पहला टाइटल गीत भी यहीं से निकला।
कवि रामावतार अभिलाषी और युयत्सु साहित्य के मर्मज्ञ थे। मास्टर खुशी राम और मास्टर गुरदयाल बेहतरीन संगीतज्ञ रहे। संदीप शर्मा और जगबीर राठी का नाम मुंबई तक पहुँचा। महाबीर गुड्डू अपने हरियाणे की शान बने। जीन्द का बूरा दूर-दूर तक बिकता था और रामकिशन की डायरी के आगे अमूल भी पानी भरता था।
नहर का कल-कल पानी, भूतेश्वर—तालाबों की रानी, किले और स्कूल वाली रामलीलाएँ—क्या भूलें, क्या बताएं। सब याद आता है, आँखों में नमी भी भर जाता है। कभी-कभी वही पहला प्यार फिर से मिल जाए—इसी आस में जीन्द चला जाता हूँ, पर सबसे मिलकर भी निराश लौट आता हूँ… निराश लौट आता हूँ।
भूली-बिसरी उम्मीदें और फसाने याद आते हैं—
“तुम याद आए और तुम्हारे साथ ज़माने याद आए।”
पवित्र पापी फ़िल्म की शूटिंग की यादें हों या आंटे वाला राजबीर देशवाल का पुलिस अफ़सर बनना—जीन्द, तू आज भी बहुत याद आता है।
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