- रिपोर्ट: मंजय वर्मा
मिर्जापुर। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार, 07 नवंबर 2025 को पुलिस लाइन मीरजापुर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा सहित पुलिस के अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं रिक्रूट आरक्षीगण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया और मातृभूमि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम का आयोजन माँ विंध्यवासिनी सभागार कक्ष में किया गया, जहाँ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली इतिहास पर आधारित प्रसारण भी देखा। इस अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का भाव गूंजता रहा।
‘वंदे मातरम्’ की रचना महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अक्षय नवमी (07 नवंबर 1875) को की थी। यह गीत पहली बार उनकी पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में और बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनन्दमठ’ (1882) में प्रकाशित हुआ। ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ है — “माँ, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ”।
1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में गाया था। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह गीत देशभक्ति का नारा बन गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने भारतीयों में एकता, साहस और त्याग की भावना को प्रज्वलित किया।
स्वतंत्र भारत में संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकृति दी। तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि यह राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही सम्मानित रहेगा।
‘वंदे मातरम्’ की पंक्तियाँ — “सुजलां सुफलां, मलयजशीतलां” — भारत की प्राकृतिक समृद्धि, सौंदर्य और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक हैं।
कार्यक्रम के दौरान एसएसपी सोमेन बर्मा ने कहा कि —
“वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि हर भारतीय के हृदय में बहने वाली भावना और देशभक्ति की आत्मा है। यह गीत हमें सदा मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।”
इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों और जवानों ने संकल्प लिया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना से करेंगे।
“वंदे मातरम्” – जय भारत, जय मातृभूमि!
