शर्मिष्ठा पानौली के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाला वजाहत खान पर कई मुकदमे दर्ज, अब लापता: पुलिस को मिली शिकायतें और राजनीतिक विवाद

सोशल मीडिया वीडियो पर शर्मिष्ठा पानौली की गिरफ्तारी

कोलकाता/गुरुग्राम। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पानौली को 30 मई को कोलकाता पुलिस ने गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार किया। पानौली पर आरोप था कि उन्होंने एक वीडियो में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए बॉलीवुड सितारों की आलोचना की और ऑपरेशन सिंदूर पर उनकी चुप्पी को निशाना बनाया। यह वीडियो बाद में हटा दिया गया था और पानौली ने माफी भी मांगी थी।

कोलकाता की एक अदालत ने उन्हें 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गिरफ्तारी की आलोचना की और कहा कि पानौली ने वीडियो डिलीट कर माफी मांग ली थी, इसलिए गिरफ्तारी अनुचित है।

वजाहत खान पर हिन्दू धर्म के अपमान का आरोप, कई शिकायतें दर्ज
वजाहत खान, जिनकी शिकायत पर शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी हुई थी, अब खुद विवादों में घिर गए हैं। कोलकाता, दिल्ली और असम में उनके खिलाफ हिंदू धर्म और देवी-देवताओं के अपमान के आरोप में कई शिकायतें दर्ज की गई हैं।

श्रीराम स्वाभिमान परिषद ने कोलकाता के गार्डन रीच थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें खान पर हिंदू समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा के उपयोग का आरोप है। शिकायत में उन्हें “रेपिस्ट कल्चर” और “यूरिन ड्रिंकर्स” जैसे अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल का दोषी बताया गया।

शिकायत के अनुसार, खान की सोशल मीडिया पोस्ट से सांप्रदायिक तनाव और धार्मिक वैमनस्य फैलाने की आशंका है। इसमें भारतीय दंड संहिता (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 196(1)(a), 299, 352, 353(1)(c) और आईटी अधिनियम की धारा 66A और 67 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।

असम सरकार ने मांगी वजाहत की हिरासत, देवी कामाख्या के अपमान का आरोप
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को जानकारी दी कि वजाहत खान के खिलाफ असम में भी एक मामला दर्ज किया गया है, जिसमें देवी कामाख्या सहित कई हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप है। असम सरकार ने पश्चिम बंगाल से उनकी कस्टडी मांगी है और सरमा ने कहा कि अब देखना होगा कि बंगाल सरकार कैसे सहयोग करती है।

वजाहत खान हुआ लापता, परिवार को मिल रही धमकियां
इसी बीच, वजाहत खान रविवार रात से लापता बताए जा रहे हैं। उनके पिता सादात खान ने बताया कि शर्मिष्ठा पानौली की गिरफ्तारी के बाद से उन्हें धमकी भरे फोन कॉल मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा निर्दोष और धर्मनिरपेक्ष है, वह कभी हिंदू धर्म का अपमान नहीं कर सकता। हो सकता है उसका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हुआ हो।”

उन्होंने बताया कि वजाहत हाल ही में मानसिक रूप से परेशान थे क्योंकि उन्हें लगातार गालियां और धमकियां मिल रही थीं। सादात खान ने खुद को भी धमकियों का शिकार बताया।

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कोलकाता पुलिस को दी शिकायत
मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रसून मैत्रा ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को ईमेल कर वजाहत खान की पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने वजाहत के दो हटाए गए पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी शिकायत के साथ संलग्न किए।

मैत्रा ने लिखा कि हाल ही में पुलिस ने जिस तरह शर्मिष्ठा के वीडियो पर त्वरित कार्रवाई की, उसी तरह वजाहत के हिंदू विरोधी पोस्ट पर भी निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि पुलिस की नैतिकता और निष्पक्षता पर सवाल न उठे।

पुलिस की प्रतिक्रिया: कानून के अनुसार कार्रवाई होगी
कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (पोर्ट), हरिकृष्ण पाई ने कहा कि हर शिकायत पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गार्डन रीच थाना, जहां पानौली का मामला दर्ज हुआ था, के अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

कोलकाता पुलिस का बयान: कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया
कोलकाता पुलिस ने रविवार को एक्स (Twitter) पर पोस्ट कर पानौली की गिरफ्तारी का बचाव किया। उन्होंने कहा, “कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स यह गलत सूचना फैला रहे हैं कि शर्मिष्ठा को पाकिस्तान विरोधी होने के कारण गिरफ्तार किया गया। यह पूरी तरह से गलत और भ्रामक है।”

पुलिस के अनुसार, पानौली को धार्मिक भावना आहत करने और समुदायों के बीच नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी नोटिस देने के कई प्रयासों के बाद की गई, जिसमें पानौली को बार-बार अनुपस्थित पाया गया।

एक गिरफ्तारी, दो धाराएं और कई विवाद
शर्मिष्ठा पानौली की गिरफ्तारी ने एक व्यापक बहस को जन्म दिया है जिसमें अब मूल शिकायतकर्ता वजाहत खान खुद कानूनी घेरे में हैं। कई राज्यों में उनके खिलाफ शिकायतें, उनका लापता होना और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप इस मामले को एक राष्ट्रीय बहस में बदल चुके हैं — जहां सवाल मुक्त भाषण बनाम सांप्रदायिक सौहार्द, पुलिस निष्पक्षता बनाम राजनीतिक दबाव, और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी पर उठाए जा रहे हैं।

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