डीएम का बड़ा फरमान— अधिकारी छोड़ें अपनी सरकारी गाड़ियां, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और साझा वाहनों से करें फील्ड विजिट

सम्पूर्ण समाधान दिवस' में भी लागू होगी नई नीति, अधिकारियों को आपसी समन्वय से करना होगा वाहनों का साझा इस्तेमाल • डीएम की आम जनता से अपील: युद्ध के हालात में जिम्मेदारी से बचाएं ईंधन; जिले में गैस-पेट्रोल का पर्याप्त भंडार मौजूद, लेकिन संयम बरतना है बेहद जरूरी

रामपुर: मध्य पूर्व में कई महीनों से जारी युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक तेल संकट की आंच अब स्थानीय प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद, जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने ईंधन बचाने के लिए एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने जनपद के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अनावश्यक सरकारी फ्लीट का मोह छोड़कर फील्ड विजिट के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर भी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय साझा वाहनों (कारपूलिंग) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि ईंधन का भंडार पर्याप्त है, लेकिन मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए संयम और बचत समय की सबसे बड़ी मांग है।

साझा वाहनों से होंगे विभागीय निरीक्षण
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को स्पष्ट हिदायत दी है कि अब फील्ड विजिट के दौरान अधिकारी अपनी अलग-अलग सरकारी गाड़ियां दौड़ाने के बजाय एक नई कार्यसंस्कृति अपनाएंगे। विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर एक ही वाहन (साझा वाहन) से निरीक्षण और दौरे करने होंगे। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का ही उपयोग करें। बहुत अधिक और अपरिहार्य आवश्यकता होने पर ही सरकारी वाहन गैराज से बाहर निकाला जाएगा। इस फैसले का सीधा असर जिले में रोजाना जलने वाले सैकड़ों लीटर सरकारी ईंधन की बचत के रूप में देखने को मिलेगा।

सम्पूर्ण समाधान दिवस के लिए विशेष रणनीति
प्रशासन की यह नई ईंधन बचत नीति केवल आम दिनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ और अन्य बड़े सरकारी कार्यक्रमों में भी पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाएगा। आमतौर पर इन आयोजनों में हर विभाग के अधिकारी अपनी अलग-अलग गाड़ियों से पहुंचते हैं, जिससे भारी मात्रा में ईंधन खर्च होता है। अब डीएम के निर्देशानुसार, सभी विभागों को एक तय रूट मैप और आपसी समन्वय बनाकर संसाधनों का साझा उपयोग करना होगा। इससे अनावश्यक ईंधन खर्च पर पूरी तरह से ब्रेक लग सकेगा।

ऊपर से मिले निर्देश, एक्शन में आया स्थानीय प्रशासन
यह पूरी कवायद केंद्र और प्रदेश सरकार की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम ईंधन बचाने के विशेष आह्वान के बाद, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी मंत्रियों और आला प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे अपने सरकारी फ्लीट (गाड़ियों का काफिला) को कम करें। शासन की इसी मंशा को धरातल पर उतारते हुए डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने जिले स्तर पर यह शासनादेश जारी किया है, ताकि वैश्विक संकट की इस घड़ी में देश के संसाधनों को सुरक्षित और संरक्षित रखा जा सके।

जनता को भरोसा— भंडार पूरा है, बस संयम बरतें
सरकारी मशीनरी की लगाम कसने के साथ-साथ जिलाधिकारी ने आम जनता से भी इस राष्ट्रीय प्रयास में सीधी भागीदारी की अपील की है। उन्होंने जनपदवासियों से आग्रह किया है कि वे भी निजी वाहनों का मोह त्याग कर सार्वजनिक परिवहन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। हालांकि, डीएम ने किसी भी तरह की पैनिक स्थिति को टालते हुए स्पष्ट किया है कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि देश और प्रदेश में गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त और सुरक्षित भंडार उपलब्ध है। फिर भी, युद्ध के कारण पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हर
नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और संयम के साथ ईंधन का इस्तेमाल करना होगा।

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