रामपुर। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के लिए शहर के इमामबाड़ा किला में आयोजित मजलिस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान ईरान के समर्थन में और अमेरिका व इजराइल के खिलाफ लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया।
मजलिस के आयोजक और पूर्व मंत्री नवाब काज़िम अली खां उर्फ नवेद मियां ने अपने संबोधन में कहा कि यह जंग केवल ईरान के मुसलमानों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के सभी मुसलमान और इंसाफ पसंद लोग इसके खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि ईरान जिस बहादुरी से अमेरिका और इजराइल का मुकाबला कर रहा है, वह इतिहास में दर्ज होगा। ट्रंप और नेतन्याहू दुनिया की शांति के लिए खतरा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई को शहीद कर देने से कोई खुश न हो, क्योंकि अब बहुत सारे खामनेई जन्म ले चुके हैं और इस जंग में इंशाअल्लाह ईरान की ही जीत होगी।
शिया धर्मगुरु सैयद अली मोहम्मद नकवी ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की गुंडागर्दी नाकाबिले बर्दाश्त है। उन्होंने कहा कि जो मुस्लिम देश इन दोनों का साथ दे रहे हैं, वे भी बराबर के गुनहगार हैं। यह समय मसलकों में बंटने का नहीं है, क्योंकि हम सबका ईमान, कलमा और कुरआन एक है। उन्होंने शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामनेई के लिए सामूहिक रूप से दुआ कराई।
मजलिस को शिया धर्मगुरु मौलाना जमा बाकरी, पूर्व विधायक अफरोज अली खां, आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता फैसल खां लाला, भाजपा नेता फसाहत अली खां शानू, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष बाकर अली खां उर्फ हारून खां, सामाजिक शख्सियत सबाहत खां, पूर्व मंत्री नवेद मियां के पीआरओ काशिफ खां, तारिफ नियाजी, मजहर रामपुरी, अरसलान खां, हसन मेहदी और हाजी नाजिश खां सहित कई लोगों ने भी संबोधित किया। मजलिस का संचालन अब्बास हैदर सहरी रामपुरी ने किया।
इस मौके पर मजलिस में शिया-सुन्नी इत्तेहाद के नारे भी गूंजे। शिया और सुन्नी समुदाय के लोग एकजुट नजर आए और तकरीरों के दौरान शिया-सुन्नी इत्तेहाद जिंदाबाद के नारे लगाए गए। पहली बार शिया धर्मस्थल में सुन्नी मुसलमानों की इतनी बड़ी संख्या देखने को मिली और सभी ने एक स्वर में ईरान का समर्थन किया।
मजलिस में गन्ना विकास परिषद के पूर्व चेयरमैन बाबर अली खां, समाजसेवी मामून शाह खां, तमकीन फैयाज, हारुन खां, इरशाद महमूद, राजा खां, नोमान खां, आरिफ खां एडवोकेट, लल्लन खां, शारिक जापानी, सोहेल पठान, जाहिद खां, मेहरबान अली, फरहत अली खां, गुलाम रब्बानी, शकील अहमद, आतिफ रजा खां, शैजी सैफी, खुशनूद खां, सैयद मोमिन इकबाल, नवेद कैसर, रफी खां, शाहरुख, शावेज खां, यासर शाह खां, रय्यान खां, अब्दुल जब्बार खां, शबाब हुसैन, तस्लीम हुसैन, उमर, अहद खां समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
