श्रीराम, जानकी व लक्ष्मण के वियोग में महाराजा दशरथ का हुआ निधन, श्रीराम को मनाने परिवार सहित वन में पहुंचे भरत, चरण पादुकाएं लेकर लौटे

ऐलनाबाद, 29 सितंबर ( एम पी भार्गव )शहर के श्री गौशाला मार्ग पर स्थित श्री रामलीला कमेटी के बैनर तले वृंदावन से आये कलाकारों की भव्य श्रीरामलीला छठे दिन भी जारी रही। मध्यरात्रि तक चली श्री रामलीला को देखने सैंकडो महिला पुरुष दर्शक पहुंच रहे है। छठे दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में श्रीरामलीला कमेटी के सदस्यों ने सामुहिक रूप से भगवान श्री कृष्ण की आरती की। श्रीरामलीला के प्रारंभ में अयोध्या के मंत्री सुमंत वैन में श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण को वापस अयोध्या लौट चलने का आग्रह करते है लेकिन श्रीराम अपने पिताश्री की आज्ञा की पालना करते हुए 14 वर्षों से पहले अयोध्या वापस लौटने से इंकार कर देते है। मंत्री सुमंत उन्हें महाराजा दशरथ के मित्र भीलराज से मिलवाकर उनसे श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण का पूरा ख्याल रखने को कहते है। श्रीराम मंत्री सुमंत को वापस अयोध्या जाने को कहते है। मंत्री सुमंत भारी मन से अयोध्या लौट आते है। इसके बाद श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण भीलराज से गंगा नदी पार करवाने को कहते है। जिस पर भीलराज उन्हें अपने एक केवट मित्र से मिलवा देते है। केवट श्रीराम के चरण धोकर उन्हें अपनी नाव में बैठाकर गंगा नदी पार करवाता है। जब श्रीराम केवट को उसकी मजदूरी देने लगते है तो केवट मजदूरी लेने से इंकार कर देता है। केवट कहता है कि प्रभु मैंने आपको गंगा नदी पार करवाई उसके बदले में आप मुझे भवसागर पार करवा देना। श्री राम उसे आशीर्वाद देकर जानकी और लक्ष्मण के साथ आगे जंगलों में चले जाते है। इधर, अयोध्या के महाराजा दशरथ अपने पुत्रों के वियोग में अस्वस्थ हो जाते है। वे बार बार श्रीराम को पुकारते और बेहोश हो जाते है। होश में आने पर उन्हें पुरानी यादें सताती है। वे मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार की घटना को याद करके बहुत दुःखी होते है। वे अपनी रानियों को बताते है कि कैसे उन्होंने एक बार जंगली जानवर की जगह गलती से मातृ-पितृ भक्त श्रवणकुमार को मार डाला था। जिस पर श्रवणकुमार के नेत्रहीन बुजुर्ग माता-पिता ने दशरथ को भी पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का श्राप दिया था। जब मंत्री सुमंत वापस उन्हें आकर बताते है कि श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण ने 14 वर्षों से पहले वापस अयोध्या लौटने से इंकार कर दिया तो महाराजा दशरथ श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण को पुकारते हुए प्राण त्याग देते है। गुरु विशिष्ठ के कहने पर ननिहाल गए राजकुमार भरत व शत्रुघ्न को तुरन्त अयोध्या बुलाया जाता है। राजकुमार भरत व शत्रुघ्न अयोध्या लौटकर लोगों के दुःखी चेहरे और राजमहल में पसरा सन्नाटा देखकर परेशान हो जाते है। वे अपनी माता केकई से इसका कारण पूछते है तो कैकेई राजकुमार भरत-शत्रुघ्न को सारी कहानी बताती हुई भरत को राजतिलक की बधाई देती है। अपने पिता महाराजा दशरथ की मृत्यु और श्रीराम, जानकी व लक्ष्मण के 14 वर्षों के लिए वनगमन की खबर सुनकर भरत-शत्रुघ्न दहाड़े मारकर रोने लगते है और कैकई को काफी बुरा भला कहते है। राजकुमार भरत अपना राजतिलक करवाने से इनकार कर देते है और श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण को वापस अयोध्या लाने वन की ओर चल पड़ते है। उनके साथ माता कौशल्या, कैकई, सुमित्रा, भाई शत्रुघ्न, मंत्री सुमंत और सैंकडो अयोध्यावासी भी वनगमन के लिए चल पड़ते है। रोता, बिलखता भरत जब जंगलों में पहुंचता है तो वहां उनकी मुलाकात भीलराज और केवट से होती है। वे उन्हें श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण से मिलवा देते है। राजकुमार भरत अपने भाई श्रीराम-लक्ष्मण और भाभी जानकी से मिलकर बहुत रोता और विलाप करता है। वे जब महाराजा दशरथ की मृत्यु का समाचार सुनते है तो श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण बुरी तरह से रोने लगते है। राजकुमार भरत व उनके साथ आये शत्रुघ्न, माता कौशल्या, कैकई, सुमित्रा और सभी अयोध्यावासी मिलकर श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण को वापस अयोध्या चलने की गुहार करते है लेकिन श्रीराम अपने दिवंगत पिताश्री की आज्ञानुसार 14 वर्षों से पहले वापस अयोध्या लौटने से इंकार कर देते है। वे भरत के बार बार आग्रह पर उन्हें अपनी चरण पादुकाएं देकर उन सब को वापस अयोध्या लौटने को कहते है। जिस पर सभी मान जाते है और राजकुमार भरत सहर्ष श्रीराम की चरण पादुकाएं अपने सिर पर धारण करके अपने सभी परिवारजनों व अयोध्यावासियों के साथ वापस लौट जाते है। श्रीरामलीला के कलाकारों के इस भावपूर्ण दृश्य पर माहौल नम हो जाता है। दर्शकों ने तालियां बजाकर वृंदावन से आये श्री रामलीला के कलाकारों के अभिनय को खूब सराहा। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष ओपी पारीक, कोषाध्यक्ष व सचिव राजेश वर्मा, सह सचिव प्रवीण फुटेला, प्रेस प्रवक्ता सुभाष चौहान, कला मंच के डायरेक्टर अशोक जसरासरिया, कला मंच के अध्यक्ष सुखराम वर्मा, कला मंच के उपाध्यक्ष संजय शेखर, सुल्तान शर्मा, देवेंद्र गोयल, त्रिलोक जोशी, मुरारी जसरासरिया, मुकेश ग्रोवर, साहिल प्रजापति, श्यामसुंदर परिहार, धर्मवीर धोकरवाल, सोनू बत्तरा, मनीष मक्कड़, अंकित जिंदल, नवशेर मान, बसंत सरिया, टीकम चोटिया व राजीव वधवा सहित अन्य कई गणमान्य जन भी उपस्थित थे।

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