जाति पूछकर निर्मम हत्या और गैंगरेप के विरोध में सड़कों पर उतरा दलित समाज, लखीसराय में गूंजे इंसाफ के नारे

लखीसराय(सरफराज़ आलम) लखीसराय में दलित शोषण मुक्ति मंच के बैनर तले मंगलवार को जोरदार प्रतिवाद मार्च निकाला गया। यह मार्च केआरके मैदान से शुरू होकर मुख्य बाजार होते हुए जिला समाहरणालय तक पहुंचा, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए।

मार्च का नेतृत्व मंच के संरक्षक रंजीत कुमार अजीत और रामपाल मांझी ने किया। प्रदर्शनकारियों ने नालंदा जिले के राजगीर में दो दलित युवकों—पिंटू पासवान और सरवन पासवान—की कथित तौर पर जाति पूछकर हत्या किए जाने के विरोध में जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की गई।

मार्च के दौरान बेगूसराय के चकिया में एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और अमानवीय व्यवहार के मामले को लेकर भी लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड के सिंगारपुर गांव में मंदिर के नाम पर दलितों के साथ हो रहे कथित भेदभाव को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने प्रशासन से इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान दलित राजनीति के बड़े चेहरों पर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेता दलितों के मुद्दों पर चुप रहते हैं और केवल वोट के समय ही उनकी याद आती है।

इस प्रतिवाद मार्च में रामपाल मांझी (सहसंयोजक), दीपक वर्मा (डीवाईएफआई जिला अध्यक्ष), कपिल देव पासवान, मुकेश पासवान, गुटर मांझी, सुरेश मांझी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए और आंदोलन को सफल बनाया।

लखीसराय में निकला यह प्रतिवाद मार्च दलित उत्पीड़न के खिलाफ बढ़ते आक्रोश का संकेत है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और पीड़ितों को न्याय कब तक मिलता है।

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