खाकी बनी फरिश्ता: कासगंज में 5 वर्षीय मासूम को डूबने से बचाया, आरक्षी गौरव कुमार ने दिखाई बहादुरी

  • रिपोर्ट: हरिश्चंद चंद्र

कासगंज। मानवता और साहस की मिसाल उस समय देखने को मिली जब ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी से भरे गड्ढे में डूब रहे 5 वर्षीय मासूम की जिंदगी बचा ली। इस साहसिक कार्य से जहां परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं खाकी का मानवीय चेहरा भी समाज के सामने उजागर हुआ। स्थानीय लोग पुलिसकर्मी को ‘भगवान’ की संज्ञा दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, एटा रोड स्थित बायपास तिराहा, सौरभ होटल के पास एक निर्माणाधीन भवन के लिए पानी का गड्ढा खोदा गया था, जिसमें लबालब पानी भरा था। इसी दौरान पास में खेल रहा एक 5 वर्षीय बच्चा संतुलन बिगड़ने से गड्ढे में गिर गया और डूबने लगा। बच्चे के रोने-चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास लोग इकट्ठा हो गए, लेकिन कीचड़ और गंदे पानी के कारण कोई भी अंदर उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।

उसी समय कासगंज पुलिस में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आरक्षी गौरव कुमार (बैच नंबर 85, टोली नंबर 3) की नजर भीड़ पर पड़ी। मौके पर पहुंचते ही उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझा और बिना एक पल गंवाए, वर्दी खराब होने की परवाह किए बिना कीचड़ और पानी से भरे गड्ढे में उतर गए। कड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने बच्चे को बाहर निकाला।

बच्चा बेहोशी की हालत में था और उसके पेट में पानी भर गया था। आरक्षी गौरव कुमार ने तत्काल सीपीआर देकर बच्चे के पेट का पानी निकाला और उसे नजदीकी अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को खतरे से बाहर बताया।

इस सराहनीय कार्य पर पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने आरक्षी गौरव कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिस का काम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता की रक्षा करना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हर संकट की घड़ी में मानवता सर्वोपरि होनी चाहिए और गौरव कुमार ने विभाग का मान बढ़ाया है।

बच्चे के परिजनों ने पुलिसकर्मी से मिलकर उन्हें ‘वर्दी में भगवान’ बताया। यह घटना सिद्ध करती है कि खाकी वर्दी केवल अनुशासन और शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, साहस और मानवता की पहचान भी है। सही मायने में “आपकी सेवा, संकल्प हमारा” के ध्येय वाक्य को इस घटना ने चरितार्थ कर दिया।

 

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