Karnataka MLC Election 2026: एपी रंगनाथ की जीत के बाद जेडीएस का राहुल गांधी पर तंज, पुट्टन्ना 908 वोटों से हारे

Karnataka MLC Election 2026: बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराकर यह सीट अपने नाम कर ली। रंगनाथ को भारतीय जनता पार्टी और जेडीएस के गठबंधन एनडीए का समर्थन प्राप्त था। चुनाव में पुट्टन्ना की हार के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा और बैलेट पेपर से हुए मतदान का उल्लेख करते हुए तंज कसा।

इस चुनाव में रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट हासिल हुए। परिणाम सामने आने के बाद जेडीएस और बीजेपी के नेताओं ने अपने उम्मीदवार की जीत का स्वागत किया। वहीं, इस नतीजे को कर्नाटक में कांग्रेस और बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के बीच राजनीतिक मुकाबले के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

908 वोटों से जीते एपी रंगनाथ

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान 23 अक्टूबर 2026 को हुआ था। मतगणना 27 अक्टूबर को पूरी हुई। इस मुकाबले में जेडीएस के एपी रंगनाथ और कांग्रेस के पुट्टन्ना आमने-सामने थे।

रंगनाथ ने कुल 10,810 प्रथम वरीयता वोट प्राप्त किए। पुट्टन्ना को 9,902 वोट मिले। इस तरह रंगनाथ ने 908 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। पुट्टन्ना इस सीट से मौजूदा विधान परिषद सदस्य थे और दोबारा चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे थे।

इस नतीजे के साथ बेंगलुरु शिक्षक सीट कांग्रेस के हाथ से निकलकर जेडीएस के पास चली गई। चुनाव में बीजेपी ने रंगनाथ का समर्थन किया था। इस वजह से जीत को बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निखिल कुमार ने राहुल गांधी पर क्या कहा?

रंगनाथ की जीत के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी को संबोधित करते हुए टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को दोष देने का मौका नहीं था, क्योंकि मतदान बैलेट पेपर से कराया गया था।

निखिल कुमार ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद एनडीए समर्थित उम्मीदवार ने जीत हासिल की। उन्होंने शिक्षकों के मतदान का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि अब हार के लिए कौन-सा बहाना दिया जाएगा। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘पेपर चोरी’ का तंज भी कसा।

उन्होंने एपी रंगनाथ, एनडीए के नेताओं और कर्नाटक में बीजेपी तथा जेडीएस के कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी।

निखिल कुमार की यह टिप्पणी राजनीतिक कटाक्ष है। इसे कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से दिए गए किसी आधिकारिक जवाब के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव परिणाम के आंकड़े और नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं अलग-अलग तथ्य हैं।

एचडी कुमारस्वामी ने जीत को बताया महत्वपूर्ण

जेडीएस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी एपी रंगनाथ की जीत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परिणाम को गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का आभार जताया।

कुमारस्वामी ने अपने संदेश में कहा कि इस चुनाव में झूठ, कुशासन, पैसे की ताकत और बाहुबल की हार हुई है। ये उनके राजनीतिक बयान के हिस्से थे। उन्होंने शिक्षकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि मतदाताओं ने प्रलोभन और सत्ता के घमंड को नकारकर मतदान किया।

कुमारस्वामी ने रंगनाथ की जीत को गठबंधन की एकता और बीजेपी-जेडीएस के बीच तालमेल का संकेत बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन का लक्ष्य केवल विधान परिषद चुनाव तक सीमित नहीं है। कुमारस्वामी ने 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए राज्य में गठबंधन की राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की बात कही।

हालांकि, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम अपने आप में 2028 के विधानसभा चुनाव का नतीजा तय नहीं करता। दोनों चुनावों का मतदाता वर्ग, क्षेत्र और राजनीतिक संदर्भ अलग हो सकते हैं।

पुट्टन्ना की हार क्यों है चर्चा में?

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पुट्टन्ना की हार इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि वह इस सीट से मौजूदा एमएलसी थे। इससे पहले वह जेडीएस से जुड़े रहे थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इस बार उनका मुकाबला उसी जेडीएस के उम्मीदवार एपी रंगनाथ से हुआ, जिसे बीजेपी का समर्थन प्राप्त था।

इस पृष्ठभूमि ने चुनाव को कांग्रेस और जेडीएस के बीच सीधे मुकाबले का रूप दिया। साथ ही, बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के लिए यह देखना भी महत्वपूर्ण था कि एक दल के मतदाता दूसरे सहयोगी दल के उम्मीदवार का कितना समर्थन करते हैं।

चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर वोटों के हस्तांतरण और आपसी तालमेल को लेकर चर्चा हुई थी। बेंगलुरु शिक्षक सीट पर रंगनाथ की जीत को गठबंधन के लिए सकारात्मक परिणाम के रूप में पेश किया गया।

फिर भी, एक निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम से पूरे राज्य में किसी दल की लोकप्रियता के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए अन्य सीटों के परिणाम, मतदान के आंकड़े और अलग-अलग क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियों को भी देखना आवश्यक है।

कर्नाटक की चार विधान परिषद सीटों पर हुआ था चुनाव

23 अक्टूबर को कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों के लिए मतदान कराया गया था। इनमें दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे।

चुनाव वाले चार क्षेत्र थे:

  • बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
  • उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
  • दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
  • पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

बीजेपी ने तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जबकि उसकी सहयोगी जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एपी रंगनाथ को मैदान में उतारा था। कांग्रेस ने चारों सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे।

मतदान के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 86.97 प्रतिशत मतदान हुआ। बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 81.98 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान प्रतिशत 75.62 रहा, जबकि दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 73.58 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान आम विधानसभा चुनावों से अलग प्रक्रिया के तहत होता है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता निर्धारित पात्रता के आधार पर मतदान करते हैं।

अन्य सीटों पर भी बीजेपी उम्मीदवारों की स्थिति पर नजर

बेंगलुरु शिक्षक सीट पर रंगनाथ की जीत के समय अन्य तीन निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना जारी थी। पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के एसवी सांकनूर कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिम्बिकाई से आगे चल रहे थे। दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट पर बीजेपी के केएम सुरेश और कांग्रेस के शशि हुलिकुंते मठ के बीच मुकाबला था। उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट पर बीजेपी के मौजूदा एमएलसी शशिल जी. नमोशी का मुकाबला कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर से था।

इन तीनों सीटों के रुझानों और अंतिम नतीजों को लेकर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई थी। बेंगलुरु शिक्षक सीट का परिणाम गठबंधन के लिए अहम था, लेकिन बाकी निर्वाचन क्षेत्रों की तस्वीर अंतिम परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट हो सकती थी।

क्या विधान परिषद चुनाव से सरकार की स्थिति बदलेगी?

कर्नाटक विधान परिषद की इन सीटों के चुनाव को राज्य की राजनीति में कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के बीच मुकाबले के तौर पर देखा गया। हालांकि, बेंगलुरु शिक्षक सीट पर रंगनाथ की जीत से राज्य सरकार की स्थिरता पर सीधे असर पड़ने की उम्मीद नहीं थी।

विधान परिषद में अलग-अलग श्रेणियों से सदस्य चुने जाते हैं या नामित होते हैं। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए समर्थन का संकेत दे सकते हैं, लेकिन उन्हें विधानसभा चुनाव के परिणामों के बराबर नहीं माना जा सकता।

कर्नाटक विधान परिषद की बेंगलुरु शिक्षक सीट पर एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। जीत के बाद जेडीएस नेता निखिल कुमार ने बैलेट पेपर से हुए मतदान का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा, जबकि एचडी कुमारस्वामी ने इसे गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण जीत बताया। अन्य तीन निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम भी राज्य की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे।

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