33 साल बाद मिला इंसाफ, पर अधूरा: फेक एनकाउंटर केस में पूर्व एसपी दोषी करार, पीड़ित परिवार बोला – बाकी आरोपी भी हों सजा के हकदार

पीड़ित का कहना है कि 33 साल बाद मेरे पिता पर आतंकवादी होने का दाग मिटाइस मौके मृतक सुरमुख सिंह की पत्नी शरणजीत कौर ने कहा कि अभी चार महीने ही हुए थे उसकी शादी को उसके पति की हत्या कर दी गईउस समय उसका बेटा उसकी कोख में था कैसे गुजरती है उस सुहागिन पर जिसकी शादी चार महीने हुए हो हाथों में लाल सुहाग का चूड़ा और हाथों में लगी मेंहदी का रंग भी नहीं उतरा था।उसके पति को मार दिया गया और उसका शव भी उसे देखने को नहीं दिया गया

अमृतसर — 1993 में हुए फेक एनकाउंटर केस में मोहाली की सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व एसपी परमजीत सिंह को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, पीड़ित परिवार इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि इस फर्जी मुठभेड़ में शामिल बाकी तीन पुलिस मुलाजिमों को भी सजा मिलनी चाहिए।

पीड़ित परिवार के अनुसार, सरमुख सिंह, जो खुद पंजाब पुलिस में कांस्टेबल थे, को 18 अप्रैल 1993 को एसपी परमजीत सिंह और अन्य पुलिस अधिकारियों ने घर से उठाया था। इसके बाद 22 अप्रैल को एक फर्जी एनकाउंटर में उन्हें आतंकवादी घोषित कर मार दिया गया। “33 साल लग गए मेरे पिता पर से आतंकवादी होने का दाग मिटाने में,” पीड़ित बेटे ने कहा।

परिवार का आरोप है कि इस मामले में सिर्फ परमजीत सिंह पर कार्रवाई करना अधूरा इंसाफ है। “उस एनकाउंटर में चार पुलिसकर्मी शामिल थे। अदालत ने सिर्फ एक को सजा दी है, बाकी तीन दोषी खुले घूम रहे हैं। हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे ताकि सभी दोषियों को सजा मिले,” परिवार ने ऐलान किया।

पीड़ित परिवार ने बताया कि एनकाउंटर के बाद उन्हें पुलिस की नौकरी से भी बेदखल कर दिया गया था। “मेरे पिता पर आतंकवाद का झूठा ठप्पा लगाया गया, जिसके चलते हमारी रोजी-रोटी भी छिन गई। अब जब अदालत ने साफ किया कि वह बेगुनाह थे, तो मुझे मेरा हक मिलना चाहिए। मुझे पुलिस की नौकरी दी जाए और जो अधिकार मेरे पिता के थे, वो मुझे सौंपे जाएं,” पीड़ित ने भावुक होते हुए कहा।

उन्होंने बताया कि गरीबी में उनका पूरा परिवार जिंदगी गुजारता रहा। “मैंने अपने पिता का चेहरा कभी नहीं देखा, सिर्फ तस्वीरों में ही देखा है। हर बार उनकी तस्वीर देखकर मेरी आंखें भर आती हैं। अगर वह आज जिंदा होते, तो हमारी जिंदगी भी कुछ और होती,” बेटे ने रुंधे गले से कहा।

परिवार ने कहा कि उन्हें इस फैसले से राहत तो मिली है लेकिन अभी भी न्याय अधूरा है। “हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे और तब तक लड़ाई जारी रखेंगे जब तक सभी दोषियों को सजा न मिल जाए।”

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