लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की नीति के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में घर या दुकान बनाने वालों के लिए नया साल 2026 बड़ी राहत लेकर आया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के अंतर्गत ‘फास्ट ट्रैक सिस्टम’ के रूप में फास्टपास (FASTPAS) लागू कर दिया है। इस प्रणाली के जरिए अब छोटे आवासीय और व्यावसायिक भवनों का मानचित्र ऑनलाइन एक क्लिक में स्वीकृत हो सकेगा।
एलडीए के अनुसार, अब लोगों को नक्शा पास कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पहले जहां यह प्रक्रिया महीनों में पूरी होती थी और रिश्वतखोरी की शिकायतें भी सामने आती थीं, वहीं अब समय की बचत होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और लागत भी कम आएगी। एलडीए ने इस नई सुविधा की जानकारी अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल के माध्यम से साझा की है, जिससे नागरिकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
क्या है फास्टपास और कैसे करेगा काम
फास्टपास एक ऑटोमेटेड डिजिटल सॉफ्टवेयर सिस्टम है, जो भवन मानचित्र की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाता है। छोटे प्लॉट्स के लिए संपत्ति मालिक स्वयं या किसी रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट के माध्यम से भवन का नक्शा अपलोड कर सकते हैं। यह सिस्टम स्वतः ही बिल्डिंग बायलॉज के सभी मानकों—जैसे सेटबैक, कवर्ड एरिया, पार्किंग, सड़क की चौड़ाई आदि—की जांच करता है। सभी मानक सही पाए जाने पर कुछ ही मिनटों में अप्रूवल सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।
यह सुविधा फिलहाल 100 वर्ग मीटर (लगभग 1076 वर्ग फुट) तक के आवासीय भवनों और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भवनों के लिए उपलब्ध है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अभी पारंपरिक प्रक्रिया ही लागू रहेगी।
आवेदन की प्रक्रिया
फास्टपास के तहत आवेदन करना बेहद आसान है। आवेदक को सबसे पहले पोर्टल map.up.gov.in पर जाना होगा।
नया अकाउंट बनाकर या लॉगिन कर आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी करनी होगी। इसके बाद भूखंड से संबंधित विवरण, जैसे लैंड यूज, खसरा नंबर और लोकेशन भरनी होगी। रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट द्वारा तैयार किया गया ऑटो कैड फॉर्मेट का नक्शा अपलोड कर सिस्टम द्वारा निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। सबमिट करते ही नक्शे की ऑटो-चेकिंग होगी और मानकों के अनुरूप होने पर तुरंत स्वीकृति मिल जाएगी। किसी त्रुटि की स्थिति में आपत्ति दर्ज होगी, जिसे सुधारकर पुनः आवेदन किया जा सकेगा।
नए सिस्टम के फायदे
फास्टपास के लागू होने से पहले जहां नक्शा पास कराने में आर्किटेक्ट फीस और अन्य खर्च मिलाकर 40 से 50 हजार रुपये तक का खर्च आता था, वहीं अब यह प्रक्रिया मात्र 5 से 7 हजार रुपये में पूरी हो सकेगी। इससे छोटे प्लॉट मालिकों, मध्यम वर्ग और छोटे व्यावसायिक दुकानदारों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। साथ ही, अवैध निर्माण पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
किन बातों का रखें ध्यान
आवेदन करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भूखंड का लैंड यूज मास्टर प्लान से मेल खाता हो। सड़क की चौड़ाई, सेटबैक, FAR और पार्किंग संबंधी विवरण सही तरीके से भरना अनिवार्य है। आधार सत्यापन और ई-केवाईसी पूरी होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की शंका या विशेष नियम लागू होने की स्थिति में एलडीए की हेल्पलाइन या आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
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