रामलीला की निरंतरता में आज मेघनाद के बाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण, संजीवनी बूटी का पहाड़ उठा लाये बजरंगबली

संगम ज्वेलर्स ब्रदर्स ने की माता की विशाल आरती

ऐलनाबाद, 2 अक्टूबर ( डॉ एम पी भार्गव ) शहर के श्री गौशाला मार्ग पर श्री रामलीला कमेटी के बैनर तले वृंदावन से आये कलाकारों की भव्य श्रीरामलीला 9वें दिन भी जारी रही। मध्यरात्रि तक चली श्री रामलीला को देखने पहुंचे दर्शको से पूरा पंडाल भरा हुआ था। इस 9वें दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में स्थानीय संगम ज्वैलर्स के संचालक व समाजसेवी राजेश सोनी ने अपने परिवारजनों जयप्रकाश सोनी, रोहित सोनी ने माँ दुर्गा के सैंकड़ों स्वरूपों और पवित्र रामायण की आरती की। श्रीरामलीला कमेटी के प्रधान सज्जन गोयल व  कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने मुख्यातिथि को माला व श्रीरामनाम का पटका पहनाकर स्वागत किया। श्रीरामलीला के प्रारंभ में समुद्र किनारे वानर सेना के साथ के इंतज़ार में बैठे अंगद हनुमानजी के लिए चिंताग्रस्त दिखाई देते है। तभी हनुमानजी लंका नगरी से सकुशल लौटकर आते है और अंगद को सारी खुशखबरी सुनाते है। अंगद उन्हें लेकर श्रीराम के पास पहुंचते है। तब हनुमानजी श्रीराम को लंका नगरी और वहां सकुशल मौजूद जानकी की सारी कहानी सुनाकर उन्हें जानकी द्वारा दी गई निशानी सौंपते है। तब श्रीराम-लक्ष्मण व सुग्रीव खुश होकर हनुमानजी को आशीर्वाद देते है। श्रीराम सुग्रीव को लंका पर चढ़ाई का आदेश देते है। इधर जब लंकापति रावण को श्रीराम की वानर सेना द्वारा लंकानगरी पर चढ़ाई करने की खबर मिलती है तो वह तिलमिला जाता है। तब रावण का भाई विभीषण उसे कुमति को त्याग कर जानकी को ससम्मान वापस श्रीराम को सौंपने की सलाह देता है जिस पर रावण और ज्यादा क्रोधित हो जाता है। वह विभीषण को अपमानित करके और लात मारकर अपने राजदरबार से बाहर निकाल देता है। अपमान का घूंट पीकर विभीषण श्रीराम की शरण मे चला जाता है। श्रीराम भी उसे सहर्ष अपने गले लगाकर मित्र बना लेते है और लंका विजय के पश्चात विभीषण को लंकापति बनाने की घोषणा कर देते है। वे विभीषण से लंका पर चढ़ाई के लिए मार्गदर्शन करने को कहते है। विभीषण उन्हें समुद्र से रास्ता मांगने के लिए उसकी पूजा करने की सलाह देते है। श्रीराम अपनी पूरी वानर सेना के साथ लंका नगरी तक रास्ता देने के लिए 3 दिनों तक समुद्र की पूजा करते है लेकिन कोई हल ना निकलता देखकर वे गुस्से में आकर समुद्र को सोखने लगते है तभी समुद्र देवता प्रकट होकर क्षमायाचना करता है। वह श्रीराम को बताता है कि आपकी सेना में नल और नील नामक वानर है जिनको आशीर्वाद प्राप्त है। उनके डाले पत्थर पानी मे तैरते है। वे लंका नगरी तक पुल बनाने में आपकी सहायता करेंगे। श्रीराम की वानर सेना नल और नील की सहायता से समुद्र पर पुल बनाकर लंका नगरी में प्रवेश कर जाते है।

अब विभीषण श्रीराम को सलाह देते है कि नियमानुसार युद्ध से पहले एक बार और शत्रु को युद्ध ना करने के लिए समझाया जाए। तक श्रीराम सबकी सलाह से युवराज अंगद को अपना दूत बनाकर लंका नगरी में भेजते है। अंगद लंका में पहुंचकर रावण के दरबार मे अपना पैर जमाकर खडा हो जाता है जिसे लंका का कोई भी वीर हटा नही पाता तो अंत मे स्वयं रावण उसका पैर हटाने आता है। अंगद रावण से कहता है कि मेरे पैर नही श्रीराम के पैर पड़ो, वे तुम्हे माफ भी कर देंगे। अंगद रावण को श्रीराम से माफी मांग लेने और जानकी को सकुशल वापस लौटा देने की सलाह देता है लेकिन घमंड में चूर रावण अंगद की एक नही सुनता बल्कि उसका मजाक उड़ाकर उसे वापस भेज देता है। अंगद वापस श्रीरामादल में लौटकर सारी कहानी सुनाता है। अब श्रीराम विभीषण सहित आने सभी शूरवीरों की सलाह से युद्ध की तैयारी शुरू कर देते है। इधर लंकापति रावण अपने पुत्र मेघनाद को रणभूमि में युद्ध के लिए भेजता है। मेघनाद का मुकाबला लक्ष्मण के साथ होता है जिसमे मेघनाद शक्ति बाण से लक्ष्मण को मूर्छित करके चला जाता है। जब हनुमानजी मूर्छित लक्ष्मण को लेकर श्रीरामादल में लौटते है तो वहां हाहाकार मच जाता है। श्रीराम सहित सभी योद्धा रो-रो कर बेहाल हो उठते है। विभीषण के सुझाव पर हनुमानजी लंका नगरी से सुषेण वैद्य को लेकर आते है। सुषेण मूर्छित हुए लक्ष्मण की हालत देखकर उनके इलाज का उपाय बताते है। वे हनुमानजी से सूर्य उदय होने से पहले पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर देने को कहते है। हनुमानजी संजीवनी बूटी लाने के लिए उड़ जाते है। रास्ते मे अनेकों बाधाएं पार कर वे सूर्योदय से पहले संजीवनी बूटी का पूरा पहाड़ लेकर श्रीरामादल में सकुशल वापस लौट आते है। इधर, श्रीरामादल में सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा है। सुषेण वैद्य मूर्छित पड़े लक्ष्मण का संजीवनी बूटी के प्रयोग से जल्दी से इलाज करते है। थोड़ी ही देर में लक्ष्मण स्वस्थ होकर उठ बैठते है। पूरे श्रीरामादल में खुशी की लहर दौड़ जाती है। सभी जय श्री राम और जय बजरंगबली का जयघोष लगाते हुए फिर से युद्ध के लिए तैयारियां शुरू कर देते है।

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