विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुए आसमान छूने वाले पर्वतारोही हुक्म चंद उर्फ चांद माही को आर्थिक सहयोग की आवश्यकता पूरी हो जाय ,तो कर सकता है देश का नाम रोशन
बिना आक्सीजन के अब माउंट एवरेस्ट को फतेह करने की तमन्ना
- डॉ एम पी भार्गव की विशेष रिपोर्ट
ऐलनाबाद, 18 जुलाई: ऐलनाबाद के पर्वतारोही हुक्म चंद उर्फ चांद माही ने विश्व की ऊँची पर्वत चोटियों को छूकर यह साबित कर दिया है कि अपनी मेहनत के बलबूते पर एक आम इंसान आसमान को भी छू सकता है। विषम परिस्थितियों से जूझते हुए पर्वतारोही हुक्म चंद ने यह मुकाम हासिल किया है। हुक्म चंद का परिवार ऐलनाबाद के ममेरा रोड वार्ड नं. 12 में रह रहा है। आर्थिक तौर पर परिवार के हालात भी काफी कमजोर है। पिता बिशनदास दिहाड़ी – मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। वहीं अब बेटे हुक्म चंद के कीर्तिमान से पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है। हुक्म चंद अब तक माउंट एल्ब्रुश , मास्को रशिया (यूरोप) ऊँचाई 18510 फीट (यूरोप की सबसे ऊँची चोटी), माउंट किलिमंजारो, दक्षिण अफ्रीका ऊँचाई 19341 फीट, माउंट नून, कारगिल, लद्दाख ऊँचाई 23409 फीट ,माउंट बाला चन्द्र, मनाली (हिमाचल प्रदेश) ऊँचाई 16000 फीट, माउंट फ्रेंडशिप, मनाली (हिमाचल प्रदेश) ऊँचाई 17352 फीट आदि ऊंची चोटियों को अपनी मेहनत से सफलतापूर्वक फतेह कर चुका है। 4 अक्टूबर 2022 को उत्तरकाशी (उत्तराखंड) में हिमस्खलन हुआ था जिसमें 29 लोगों की जान चली गई थी.
वहां पर भी हुक्म चंद ने रेस्क्यू किया। इस रेस्क्यू में उसने अनेक लोगों की जान बचाई थी। हुक्म चंद एक जरूरतमंद परिवार से सम्बन्ध रखता है। इन सभी चोटियों को फतेह करने में शहर की सामाजिक संस्थाओं ने आर्थिक व सामाजिक तौर पर हुक्म चंद का पूरा साथ दिया है। हुक्म चंद का कहना है कि शहरवासियों के सहयोग से ही वह इन चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराने में कामयाब रहा है। उसके पारिवारिक हालात सही नहीं है और उसे अब भी आर्थिक सहयोग की जरूरत है। हुक्म चंद ने बताया कि अब वह बिना आक्सीजन के विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट और माउंट लोतसे फतेह करके अपने शहर का नाम रोशन करना चाहता है परन्तु इसके लिए उसको आर्थिक सहयोग की जरूरत है। उसने सभी लोगों को अपील करते हुए कहा कि इस मिशन में कामयाब होने के लिए वह उसकी हर संभव आर्थिक सहायता जरूर करें ताकि वह अपने शहर, जिले व हरियाणा का नाम रोशन कर सकें।

