‘बीजेपी महाराष्ट्र और मराठी विरोधी क्यों है, समझ नहीं आता’: आदित्य ठाकरे का तीखा हमला
मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद पर आदित्य ठाकरे ने भाजपा को घेरा
महाराष्ट्र: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को महाराष्ट्र में चल रहे भाषाई विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि:
“हमें समझ नहीं आता कि बीजेपी महाराष्ट्र और मराठी लोगों के खिलाफ क्यों है।”
यह बयान उस समय आया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं को मराठी भाषा के समर्थन में प्रदर्शन करने के चलते मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया।
मनसे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर जताई आपत्ति
आदित्य ठाकरे ने मुंबई में मनसे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर कहा, “हर नागरिक को इस देश में प्रदर्शन का अधिकार है। यह विरोध शांतिपूर्ण था, लेकिन फिर भी बीजेपी सरकार ने लोगों को गिरफ्तार किया।”
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से यह साफ होता है कि सरकार जनता की आवाज दबाना चाहती है।
भाजपा पर समाज में ‘नफरत फैलाने’ का आरोप
ठाकरे ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा मराठी और गैर-मराठी समुदायों के बीच संघर्ष उत्पन्न करने की है। उन्होंने कहा:
“बीजेपी नफरत फैला रही है और मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा खड़ा कर रही है। बिहार और बीएमसी चुनाव को ध्यान में रखते हुए वे समाज में विभाजन पैदा करना चाहते हैं, लेकिन उनकी यह साजिश सफल नहीं होगी।”
मनसे का विरोध और पुलिस की कार्रवाई: मामला क्या है?
- मनसे कार्यकर्ता मुंबई के मीरा-भायंदर क्षेत्र में व्यापारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, जिन पर आरोप था कि वे मराठी में बात नहीं कर रहे हैं।
- पुलिस ने पहले ही इस रैली के लिए अनुमति नहीं दी थी, यह कहते हुए कि इससे कानून व्यवस्था भंग हो सकती है।
- इसके बावजूद, मनसे कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जिसके चलते पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
पुलिस का बयान: वैकल्पिक मार्ग सुझाया गया था
मीरा-भायंदर, वसई-विरार के पुलिस आयुक्त मधुकर पांडे ने बताया कि कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है और उन्होंने शहरवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
“हमने प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया था, लेकिन मनसे कार्यकर्ताओं ने उसे अस्वीकार कर दिया।”
बीएमसी चुनाव की पृष्ठभूमि में राजनीतिक माहौल गरमाया
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव नजदीक हैं और सभी राजनीतिक दल भाषा, पहचान और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर रणनीति बना रहे हैं। इस संदर्भ में भाजपा और मनसे के बीच मतभेद, और अब शिवसेना (यूबीटी) के तीखे तेवर, साफ तौर पर संकेत देते हैं कि मराठी अस्मिता फिर से चुनावी मुद्दा बन रही है।
