“कुंवारा तो हूँ, लेकिन ब्रह्मचारी नहीं।”

गुस्ताख़ी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

जब जाने-माने पत्रकार वेद प्रताप वैदिक ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को कहा— “खुश हो, छड़े को छड़ी मिल गई”।

वैदिक जी आज 82 वर्ष के होते। उनके अटल बिहारी वाजपेयी से बेहद करीबी संबंध थे। उन्होंने मुझे यह किस्सा सुनाया था।

अटल बिहारी वाजपेयी के घुटने के ऑपरेशन के बाद, वैदिक जी ने उनका हाल-चाल जानने के लिए फोन किया। इस पर अटल जी ने कहा, “और तो सब ठीक है, लेकिन डॉक्टरों ने मुझे चलने के लिए छड़ी पकड़ा दी है।”

यह सुनकर वैदिक जी ने कहा, “आपको तो खुश होना चाहिए, क्योंकि एक छड़े (कुंवारे) को छड़ी (कन्या) मिल गई है।”

यह सुनते ही अटल बिहारी वाजपेयी ठहाका मारकर हंसने लगे।

वैदिक जी गुरुग्राम में मेरे पड़ोसी थे और मैं उनसे अक्सर मिलता था।

दुमछला—

वाजपेयी जी कहते थे, “कुंवारा तो हूँ, लेकिन ब्रह्मचारी नहीं।”

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