रिटायर्ड कर्नल दिवेंद्र सिंह राजपूत के जज़्बे को सलाम: 40 पेड़ों की कटाई के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी लड़ाई

ग़ुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

करनाल के सेक्टर-9 में स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय को हाईवे से सीधे जोड़ने के लिए बनाई गई 100 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी लिंक रोड के निर्माण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। इस सड़क के लिए करीब 40 पेड़ों की कटाई की गई, जिसका कड़ा विरोध रिटायर्ड कर्नल दिवेंद्र सिंह राजपूत ने किया।

दुर्भाग्यवश, यह बीजेपी कार्यालय कर्नल राजपूत के घर से सटा हुआ है। वर्ष 2023 में जैसे ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू हुआ, कर्नल साहब ने तुरंत स्टे पिटिशन दाख़िल कर दी। लेकिन किसी आदेश के आने से पहले ही रातों-रात 100 से 150 मज़दूरों को लगाकर बुलडोज़र, डंपर और रेत-बजरी के साथ तेज़ी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। जब तक स्टे ऑर्डर आया, तब तक सड़क का लगभग 95 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका था।

यह सवाल भी उठा कि जहाँ आम जनता को टूटी सड़कों की मरम्मत के लिए महीनों, बल्कि साल भर तक इंतज़ार करना पड़ता है, वहाँ यह सड़क महज़ दो दिनों में कैसे बन गई? इसी सवाल को लेकर कर्नल राजपूत ने पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखे, लेकिन कहीं से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जहाँ उनकी याचिका खारिज कर दी गई। बावजूद इसके, कर्नल साहब ने हार नहीं मानी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने न्याय करते हुए सड़क को तोड़ने और तीन महीने के भीतर उस क्षेत्र को दोबारा ग्रीन बेल्ट में बदलने का आदेश दिया।

1971 के युद्ध में वीर चक्र से सम्मानित कर्नल दिवेंद्र सिंह राजपूत ने अपने इंटरव्यू में कहा,
“यह लड़ाई जंग से भी ज़्यादा मुश्किल थी।”

यह मामला बताता है कि पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई आसान नहीं है। अपने आसपास के पेड़ों को बचाने, अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ उठाने और सत्ता के सामने डटे रहने के लिए असाधारण साहस चाहिए। कर्नल साहब के इस जज़्बे को सलाम है। उनकी यह कहानी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे, ताकि पर्यावरण और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़े।

 

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