गुस्ताखी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
हरियाणा पर्यटन के कई रिजॉर्ट्स को बेचने या लीज पर देने की तैयारी को लेकर सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने के लिए 10 मार्च को चंडीगढ़ में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है।
एक समय था जब हरियाणा पर्यटन के रिजॉर्ट्स की देशभर में अच्छी प्रतिष्ठा थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के गतिशील नेतृत्व में आईएएस अधिकारियों एस.के. मिश्रा और अशोक पाहवा की परिकल्पना से इन पर्यटन स्थलों की शुरुआत हुई थी। इन रिजॉर्ट्स का नाम पक्षियों के नाम पर रखा गया था और यह पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय थे।
लेकिन समय के साथ कुप्रबंधन और सरकार की लापरवाह कार्यशैली के कारण इनकी गुणवत्ता में गिरावट आती चली गई। बताया जा रहा है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कुछ लोग विशेष रूप से एनसीआर क्षेत्र में स्थित इन पर्यटन परिसरों पर नजर गड़ाए हुए हैं।
पर्यटन विभाग के निदेशक पार्थ गुप्ता ने भी संकेत दिए हैं कि सरकार इन पर्यटन परिसरों को लीज पर देने की योजना बना रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि जहां बिक्री अधिक है, वहां कर्मचारियों की भारी कमी है, जबकि जहां बिक्री कम है वहां कर्मचारियों की संख्या जरूरत से ज्यादा है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इन महत्वपूर्ण संपत्तियों को लीज पर देने के बजाय इनके सुधार और विकास के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए।
टेलपीस:
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल के दौरान रोहतक के प्रमुख स्थान पर स्थित मैना टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स को नीलाम करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कर्मचारियों के विरोध के कारण यह योजना अमल में नहीं आ सकी। गुरुग्राम का शमा टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स भी बदहाल स्थिति में है और इसके सुधार की ओर सरकार का ध्यान नहीं जा रहा। वहीं दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर पर्यटन विभाग की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा बताया जा रहा है। अपनी जमीन वापस लेने के बजाय विभाग कमजोर आधारों पर टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स बेचने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
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