सिरसा (सी एम ग्रोवर प्रेसवार्ता) पिछले दो दशक से हरियाणा की राजनीति में सक्रिय इनैलो ही एकमात्र ऐसा राजनीतिक दल बनकर उभर रहा है, जिसने कांग्रेस की राजनीतिक धड़कने बढ़ा दी है। हरियाणा में कई क्षेत्रीय दल अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही दम तोड गये या फिर वापसी की तरफ मुड़ गये। इनैलो में भी आया बिखराव और इनैलो से अलग होकर बनी जजपा ने भाजपा को दूसरी पारी में सहयोग देकर साढ़े चार साल तक सत्ता सुख लिया, मगर मजबूत संगठन तैयार नहीं कर पाई, बल्कि भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को जरूर कमजोर करने में सफल रही, जिससे भाजपा का जनाधार खिसकता गया। विधानसभा चुनाव में जजपा का खाता नहीं खुला, जबकि इनैलो ने दो विधानसभा क्षेत्रों में विजय हासिल की। हरियाणा में कांग्रेस की संभावित सरकार की लहर से प्रभावित बहुत से राजनेताओं ने अपनी पार्टी को अलविदा कहकर कांग्रेस का ध्वज उठाया और ऐसे ही कुछ राजनेताओं की बदौलत कांग्रेस सत्ता तक नहीं पहुंच पाई, क्योंकि ऐसे चेहरे मतदाताओं द्वारा पसंद नहीं किये गये। ऐसे चेहरों को कांग्रेस अब तव्वजो नहीं दे रहीं और उनका निजी वोट बैंक खिसकना शुरू हो गया है। घर वापसी के बंद दरवाजे ऐसे नेताओं को संकेत दे रहे हैं कि आपकी राजनीतिक नजर कमजोर हो गई है और उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चश्मा (इनैलो का चुनाव चिन्ह) लगा लेना चाहिए। लोकसभा क्षेत्र सिरसा कभी इनैलो के गढ़ के नाम से जाना जाता था और अब फिर अपनी मजबूत पकड़ के साथ पहचान बनाने की तरफ बढ़ रहा है। इनैलो की धुरंधर नेत्री सुनैना चौटाला और जुझारू योद्धा जसवीर जस्सा जिला प्रधान के प्रयास रंग लाए रहे हैं, जिनसे इनैलो का काफिला बढ़ रहा है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में तत्कालीन भाजपाई सांसद सुनीता दुग्गल को टिकट से वंचित रखकर और विधानसभा चुनाव में सिरसा भाजपा प्रत्याशी का नामांकन पत्र वापस लेकर भाजपाइयों को ऐसा राजनीतिक घाव दिया है कि उसपर कोई भी मरहम लाभदायक साबित नहीं हो रही। भाजपा के खिलाफ भाजपाई दिग्गजों के मोर्चा खोल देने से भाजपा पक्षीय सोच रखने वालों की सोच में बदलाव आना शुरू हो गया है। वर्तमान में इस लोकसभा से कांग्रेस की सैलजा सांसद है, जिसका सिर्फ एक ही कथन सुना जा सकता है कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है। वैसे भी इस लोकसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक ज्यादा है और सैलजा और हुड्डा का राजनीतिक प्रेम जगजाहिर है।आम आदमी पार्टी आम आदमी तक पहुंच नहीं पा रही, वहीं जजपा अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। क्षेत्र की राजनीतिक मानचित्र पर नजर डालने से देखा जा सकता है कि इस लोकसभा क्षेत्र में अपनी कथनी और करनी में इनैलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला पसंदीदा बने हुए हैं और यही कारण कहा जा सकता है कि इनैलो का आंकड़ा बढ़ रहा है। इनैलो सुप्रीमो अभय चौटाला के दोनों बेटे भी राजनीति में सक्रिय हैं, जिनमें कर्ण चौटाला जिला परिषद के चेयरमैन हैं तो अर्जुन चौटाला रानियां से विधायक की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।
