ऐलनाबाद 22 मई ( एम पी भार्गव ). जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीष जिंदिया की अदालत ने वर्ष 2019 में उप मंडल ऐलनाबाद के गांव संतनगर में हुए लखबीर सिंह हत्याकांड मामले में चौथे दोषी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंजाब के जिला मुक्तसर स्थित थाना लंबी के गांव थिराजवाला निवासी जसबीर सिंह ने 5 दिसंबर 2019 को थाना रानियां में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसका भाई लखबीर सिंह अन्य मजदूरों के साथ गांव संतनगर में पराली एकत्रित करने का कार्य कर रहा था। 4 दिसंबर 2019 को खेत में काम करने वाले कुछ लोगों के साथ कहासुनी हो गई थी। इसी रंजिश के चलते रात के समय खेत में सो रहे लखबीर सिंह की तेजधार हथियारों से हत्या कर दी गई।जांच के दौरान पुलिस ने महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। मामले में आरोपी सफाक पुत्र मोहम्मद इस्लाम निवासी वार्ड नंबर-1, गोदवारा पथकैली, जिला पूर्णिया (बिहार) को अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।गौरतलब है कि इस मामले में तीन अन्य दोषियों राधेश्याम, शंकर और उमेश को अदालत पहले ही दोषी ठहरा चुकी है। रानियां थाना पुलिस द्वारा की गई प्रभावी जांच और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को सजा दिलाने में सफलता मिली।
दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता : उपायुक्त
जिला स्तरीय समिति की बैठक में 21 मामलों पर हुआ विचार
नेशनल ट्रस्ट एक्ट के तहत अभिभावक नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा
ऐलनाबाद ,सिरसा, 22 मई ( एम पी भार्गव )
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके हितों का संरक्षण प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से जिला स्तरीय समिति द्वारा नेशनल ट्रस्ट एक्ट के तहत अभिभावक नियुक्ति से संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है। उपायुक्त के निर्देशानुसार आयोजित समिति की बैठक में 21 आवेदनों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में बौद्धिक दिव्यांगता और सेरेब्रल पालिसी से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए अभिभावकों की जिम्मेदारियों, दिव्यांगजनों की देखभाल, संपत्ति संरक्षण तथा वार्षिक लेखा-जोखा संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपायुक्त ने कहा कि नियुक्त अभिभावकों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे दिव्यांगजन के हितों की रक्षा सुनिश्चित करें और नियमानुसार सभी आवश्यक दस्तावेज एवं विवरण समय पर प्रस्तुत करें।
उपायुक्त ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों और उनके परिजनों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं तथा नेशनल ट्रस्ट एक्ट के प्रावधानों के बारे में अधिक से अधिक जागरूक किया जाए, ताकि पात्र व्यक्ति योजनाओं का लाभ लेकर कानूनी संरक्षण प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाना भी आवश्यक है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सत्यवान ढिलोड़ ने बताया कि नेशनल ट्रस्ट एक्ट के तहत गठित जिला स्तरीय समिति दिव्यांगजनों के हितों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रही है ।
