“त्रिशूल मार्का ईंट” के संस्थापक हाजी अब्दुल हुसैन का निधन, उद्योग जगत में शोक की लहर

रामपुर: जनपद रामपुर के वरिष्ठ उद्योगपति, प्रतिष्ठित भट्ठा संचालक एवं समाजसेवी हाजी अब्दुल हुसैन का बीते मंगलवार को इंतक़ाल हो गया। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव लाला नगला (बिलासपुर) में अकीदतमंदों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों की मौजूदगी में किया गया। उनके निधन से उद्योग जगत और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।

हाजी अब्दुल हुसैन जनपद के सबसे वरिष्ठ भट्ठा संचालकों में गिने जाते थे। उन्होंने “त्रिशूल मार्का ईंट” ब्रांड की स्थापना कर उसे गुणवत्ता, भरोसे और ईमानदारी की मजबूत पहचान दिलाई। दशकों तक ईंट उद्योग से जुड़े रहते हुए उन्होंने सैकड़ों परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया और व्यापार जगत में विशेष सम्मान अर्जित किया। उनकी पहचान केवल रामपुर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि रुद्रपुर, हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल जैसे क्षेत्रों तक उनके ब्रांड की मजबूत साख रही।

एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले हाजी साहब ने अपनी मेहनत, लगन और दूरदर्शिता के बल पर उद्योग और समाज सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट स्थान बनाया। वे भले ही सक्रिय राजनीति से दूर रहे, लेकिन सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से उनके मधुर संबंध रहे।

उनकी पुत्री ज़ाहिदा सलाम रामपुर ज़िला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उनके पुत्र ज़ाकिर हुसैन बिलासपुर ब्लॉक के उप ब्लॉक प्रमुख रहे और वर्तमान में रामपुर ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष हैं। वहीं छोटे पुत्र शाहिद हुसैन राष्ट्रीय लोक दल के रामपुर जिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

उनके अंतिम संस्कार में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाफिज अब्दुल सलाम, रामपुर के सांसद मोहिबुल्ला नदवी, पूर्व मंत्री हाजी अकबर हुसैन, किसान नेता तजिंदर सिंह विर्क, जिला पंचायत सदस्य अमरजीत सिंह, हरीश जैन, धर्मपाल जैन, लाला हरदेव रस्तोगी, रालोद किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार बलजीत सिंह बिट्टू, खूब चंद गुप्ता और रालोद जिला महासचिव प्रभात भारद्वाज सहित अनेक राजनीतिक, सामाजिक और व्यापारिक हस्तियों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

हाजी साहब के पुत्र एवं रालोद जिला अध्यक्ष शाहिद हुसैन ने बताया कि उनके पिता कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। सोमवार रात अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया।

उन्होंने कहा कि उनके पिता का निधन परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने परिवार और समाज को मेहनत, ईमानदारी और भाईचारे की जो सीख दी, वही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।

 

 

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