Greenland: भूवैज्ञानिक शोध का दावा, ग्रीनलैंड पहले से ही उत्तरी अमेरिका का हिस्सा

ग्रीनलैंड को लेकर हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानबाज़ी तेज रही है। इसी बीच एक वैज्ञानिक शोध ने इस विषय को बिल्कुल नए नजरिए से देखने की वजह दी है। भूविज्ञान के अनुसार, ग्रीनलैंड पहले से ही उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है और यह उत्तरी अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट पर मजबूती से टिका हुआ है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में एक बार फिर कहा कि वह ग्रीनलैंड पर अमेरिका का अधिकार चाहते हैं। हालांकि, कब्जे की राजनीति से अलग अगर भूविज्ञान की बात की जाए, तो वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनलैंड भूगर्भीय रूप से पहले ही उत्तरी अमेरिका से जुड़ा हुआ है।

जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध

जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: सॉलिड अर्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई है कि ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट पर स्थित है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्लेट के साथ-साथ धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम दिशा में खिसक रहा है, यानी उसी दिशा में जहां अमेरिका और कनाडा स्थित हैं।

कैसे किया गया शोध

वैज्ञानिकों ने ग्रीनलैंड की चट्टानों में सीधे ड्रिलिंग की और GNSS स्टेशनों का उपयोग किया। ये अल्ट्रा-सटीक GPS जैसे उपकरण होते हैं, जो साल में कुछ मिलीमीटर जितनी मामूली हलचल को भी दर्ज कर सकते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर प्लेट की गति और दिशा का आकलन किया गया।

क्या निकला शोध का परिणाम

शोध के नतीजों से पता चला कि ग्रीनलैंड उत्तर-पश्चिम की ओर खिसक रहा है। इसका कारण यह है कि पूरी उत्तरी अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट धीरे-धीरे घूम रही है, और ग्रीनलैंड उसी के साथ आगे बढ़ रहा है।

क्या है यूलर पोल

टेक्टोनिक प्लेटों का यह घूर्णन एक काल्पनिक बिंदु के चारों ओर होता है, जिसे “यूलर पोल” कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तरी अमेरिकी प्लेट का यूलर पोल गैलापागोस द्वीप समूह और इक्वाडोर के आसपास कहीं स्थित है।

ग्रीनलैंड की बर्फ में भी हलचल

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि सिर्फ प्लेट ही नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड की बर्फ में भी बदलाव हो रहा है। लाइव साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड के नीचे स्थित मेंटल अब भी लगभग 20,000 साल पहले हुई बर्फ की चादरों में बदलाव के अनुसार खुद को समायोजित कर रहा है।

पहले ग्रीनलैंड की बर्फ काफी भारी थी। बर्फ की मोटी परतों के दबाव से पृथ्वी की मेंटल धंस गई थी और गाढ़ा, चिपचिपा पदार्थ किनारों की ओर खिसक गया था। अब ग्लोबल वार्मिंग के कारण जब बर्फ तेजी से पिघल रही है, तो यह पदार्थ धीरे-धीरे वापस मेंटल में लौट रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया हजारों सालों में पूरी होती है।

 

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