Gold Price Crash: एक साल के निचले स्तर पर पहुंचा सोना, आज को तेजी से खुल सकता है बाजार; क्या लौटेगी चमक?

नई दिल्ली: सोने की कीमतों में लगातार गिरावट ( Gold Price Crash) के बीच निवेशकों और सर्राफा बाजार की नजर अब सोमवार, आज 2 नवंबर के कारोबार पर टिकी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अक्टूबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, महंगाई की आशंकाओं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, कम कीमतों और तकनीकी संकेतों के चलते सोमवार को सोने और चांदी की शुरुआत तेजी के साथ होने की संभावना जताई जा रही है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तेज गिरावट के बाद सोने में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन केवल तेजी से कारोबार शुरू होना कीमतों में स्थायी रिकवरी का संकेत नहीं होगा। इसके लिए सोने को महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर टिकना जरूरी होगा।

Gold Price Crash:  एक साल के निचले स्तर पर पहुंचा सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत करीब 3,876 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई। इस गिरावट के साथ सोना अक्टूबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सप्ताह के आधार पर कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अक्टूबर महीने में सोना करीब 8.15 प्रतिशत टूट चुका है।

अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी भारी कमजोरी देखने को मिली। शुक्रवार के कारोबार में इसमें 3.63 प्रतिशत की गिरावट आई और यह करीब 3,885 डॉलर प्रति औंस के आसपास बंद हुआ।

सोने की कीमतों में आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में लगातार बिकवाली के कारण कीमती धातुओं की तेजी पर फिलहाल विराम लगा हुआ है।

Gold Price Crash: भारत में भी 1.40 लाख रुपये से नीचे फिसला सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। घरेलू हाजिर बाजार में सोने की कीमत 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे चली गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 4 दिसंबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स अनुबंध 0.05 प्रतिशत गिरकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। वहीं चांदी का फ्यूचर्स भाव 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,78,900 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि घरेलू बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सोने के खुदरा भाव टैक्स, मेकिंग चार्ज और स्थानीय बाजार की स्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं।

Gold Price Crash: कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई ने बढ़ाई चिंता

सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगाई की आशंकाएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता प्रमुख हैं।

जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका सोने जैसी ऐसी संपत्तियों के लिए चुनौती बनती है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता।

इसके अलावा अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी सोने की कीमतों को प्रभावित करते हैं। निवेशक वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी रोजगार से जुड़े आंकड़ों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

Gold Price Crash:  तीन सप्ताह में सोने पर 6 प्रतिशत से ज्यादा बिकवाली का दबाव

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, सप्ताह के शुरुआती कारोबारी सत्रों में उतार-चढ़ाव और कुछ समय की रिकवरी के बावजूद आखिरी दिनों में सोने में बिकवाली तेज हो गई।

उनके अनुसार, पिछले तीन सप्ताह में सोने पर कुल मिलाकर 6 प्रतिशत से अधिक बिकवाली का दबाव देखा गया है। यह बाजार में कमजोर धारणा को दर्शाता है।

इस गिरावट के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों की महत्वपूर्ण भूमिका रह सकती है।

Gold Price Crash:  आज 2 नवंबर को गैप-अप ओपनिंग की उम्मीद क्यों?

वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट के मुताबिक, MCX पर सोना और चांदी दोनों कमजोर तकनीकी रुझान के साथ कारोबार कर रहे हैं। दैनिक और साप्ताहिक चार्ट पर कीमतों में लगातार निचले स्तर बनने से शॉर्ट और मीडियम टर्म में दबाव दिखाई दे रहा है।

हालांकि, शुक्रवार की तेज गिरावट के बाद दोनों धातुओं के तकनीकी संकेत ओवरसोल्ड स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सोमवार को तकनीकी आधार पर कुछ खरीदारी आ सकती है।

इसी वजह से 2 नवंबर को सोने और चांदी की शुरुआत पिछले बंद भाव से ऊपर यानी गैप-अप होने की संभावना जताई गई है। लेकिन यह केवल संभावित तकनीकी उछाल है, इसकी गारंटी नहीं है।

Gold Price Crash:  क्या तेजी स्थायी रिकवरी में बदल पाएगी?

विश्लेषकों के मुताबिक, सोमवार को अगर सोने की कीमतों में तेजी आती है तो बाजार की नजर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तरों पर रहेगी। यदि कीमतें इन स्तरों को पार करके उनके ऊपर टिकने में सफल नहीं होती हैं तो तेजी अस्थायी साबित हो सकती है।

ऐसी स्थिति में ऊंचे भाव पर फिर से बिकवाली का दबाव बन सकता है। इसलिए केवल गैप-अप ओपनिंग को सोने में नई तेजी की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।

निवेशकों के लिए बाजार की दिशा, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम और तकनीकी संकेतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों ने भी मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

Gold Price Crash:  सोने की कीमतों में आगे किन बातों का रहेगा असर?

आने वाले कारोबारी सत्रों में सोने की दिशा मुख्य रूप से इन कारकों से प्रभावित हो सकती है:

– अमेरिकी ब्याज दरें: फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें।
– कच्चे तेल की कीमतें: तेल में तेजी से महंगाई की आशंकाएं बढ़ सकती हैं।
– डॉलर इंडेक्स: डॉलर की मजबूती या कमजोरी का सोने की कीमतों पर असर।
– अमेरिकी आर्थिक आंकड़े: रोजगार और महंगाई से जुड़े आंकड़े बाजार की धारणा बदल सकते हैं।
– तकनीकी स्तर: सोने का महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तरों के ऊपर टिकना रिकवरी के लिए अहम होगा।

फिलहाल सोना एक साल के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। 2 नवंबर को संभावित गैप-अप ओपनिंग से बाजार को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन स्थायी रिकवरी के लिए मजबूत संकेतों की जरूरत होगी।

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