नई दिल्ली। पृथ्वी पर आज भले ही हरियाली का व्यापक विस्तार दिखता हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब धरती पर न पेड़ थे और न घास। हालिया शोध के अनुसार लगभग 50 करोड़ साल पहले पृथ्वी की अधिकांश सतह सूखी चट्टानों और बंजर भूमि से ढकी हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक जीवन की शुरुआत समुद्रों में हुई और शुरुआती पौधों के पूर्वज भी पानी में ही विकसित हुए। ये पौधे बेहद सरल और छोटे हरे जीव थे, जिन्हें शैवाल के रूप में जाना जाता है। आज भी शैवाल समुद्र तटों, तालाबों और चट्टानों पर हरी काई के रूप में देखे जा सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार शैवाल करीब एक अरब वर्षों से पृथ्वी के महासागरों और झीलों में मौजूद हैं। ये सूर्य के प्रकाश, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं और इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं।
‘ग्रेट ऑक्सीजनेशन इवेंट’ से बदली धरती
शुरुआती समय में पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन बहुत कम थी, लेकिन शैवाल और सूक्ष्म जीवों द्वारा लंबे समय तक ऑक्सीजन छोड़ने से एक बड़ा परिवर्तन हुआ, जिसे ग्रेट ऑक्सीजनेशन इवेंट कहा जाता है। इस घटना ने जटिल जीवन के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
समुद्र से जमीन पर आए पौधे
शोध के अनुसार लगभग 47 करोड़ साल पहले असली पौधे हरे शैवाल से विकसित हुए। ये शुरुआती पौधे समुद्र के किनारे उथले पानी में रहते थे और धीरे-धीरे बदलते वातावरण के अनुसार जमीन पर खुद को ढालने लगे।
जमीन पर टिकने के लिए पौधों में मजबूत कोशिका भित्तियां विकसित हुईं, जिससे वे सीधे खड़े रह सके। वहीं ‘राइजॉइड्स’ नामक जड़ों जैसे ढांचे ने उन्हें मिट्टी से पानी और खनिज लेने में मदद की।
फूलों वाले पौधों का विकास
वैज्ञानिकों के अनुसार पेड़ों और आधुनिक पौधों का बड़ा विकास लगभग 14 करोड़ साल पहले हुआ, जब एंजियोस्पर्म यानी फूलों वाले पौधे अस्तित्व में आए।
इस तरह समुद्र में जन्मे छोटे-से शैवाल से लेकर आज के विशाल वृक्षों तक, पौधों का यह विकास पृथ्वी के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है।
