बाढ़ का खतरा मंडराया: घग्घर नदी में पानी आने से गांवों में भय, तटबंध नहीं हुए मजबूत – कुमारी सैलजा

हर साल दोहराई जाती है लापरवाही: सैलजा ने भाजपा सरकार को घेरा

  • रिपोर्ट: एमपी भार्गव

ऐलनाबाद:  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने घग्घर नदी में आए पानी और बाढ़ के संभावित खतरे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक तटबंधों को मजबूत नहीं किया है, जिससे गांवों में भय और नाराजगी का माहौल है।

घग्घर नदी पांच बार दिखा चुकी है तबाही का मंजर
कुमारी सैलजा ने बताया कि सिरसा जिला पहले भी घग्घर नदी की बाढ़ से 1988, 1993, 1995, 2010 और 2023 में भारी नुकसान झेल चुका है। 2010 में तो 70 से अधिक गांव और 33,000 एकड़ से ज्यादा फसल बर्बाद हो गई थी।

सरकार आंखें खोले, अब भी समय है: सैलजा की चेतावनी
सैलजा ने कहा कि हर साल तटबंधों की मरम्मत और सफाई के लिए बजट आता है, लेकिन वास्तविक कार्य नहीं होता। अधिकारी बहानेबाज़ी करते हैं – जैसे “तटबंध चूहों की वजह से टूटे”। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा, “भाजपा वाले अब तो आंखें खोल लो, अभी भी समय है।”

84 से 90 किमी तक घग्घर का खतरा – फतेहाबाद से सिरसा तक
सैलजा ने जानकारी दी कि घग्घर नदी पंजाब से जाखल के पास हरियाणा में प्रवेश करती है और फतेहाबाद में 84 किलोमीटर, सिरसा में 90 किलोमीटर तक बहती है। बरसात में इसका जलस्तर बढ़ जाता है और बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है।

कमजोर तटबंध, बर्बाद होती फसलें
उन्होंने बताया कि जैसे ही नदी में जलस्तर बढ़ता है, कमजोर तटबंध टूट जाते हैं और खेतों में पानी भरकर फसलें नष्ट हो जाती हैं। सिरसा के आसपास खैरंका, झोपड़ा, रंगा, पनिहारी, बूढ़ाभाणा जैसे कई गांव ऐसे हैं जहां हर बार बाढ़ का खतरा अधिक रहता है।

सिर्फ कमेटियां बनाने से कुछ नहीं होगा, चाहिए ठोस कार्रवाई
सैलजा ने कहा कि प्रशासन कंट्रोल रूम और फ्लड कमेटियां तो बना देता है, लेकिन असली ज़रूरत तटबंधों की मजबूत मरम्मत और नदी की सफाई की है, जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

घग्घर से निकलने वाली नहरों पर विवाद – किसानों के साथ अन्याय
उन्होंने हाल ही में रानियां हलके में किसानों और प्रशासन के बीच हुए विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। नहरों की पाइप हटाने को लेकर उपजे विवाद को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सैलजा ने कहा कि किसानों से बिना संवाद के ऐसा कदम उठाना सरासर अन्याय है।

सरकार बनाए किसानों के लिए स्पष्ट और स्थायी नीति
कुमारी सैलजा ने सरकार से किसानों के लिए एक स्पष्ट नीति की मांग की, जिसमें:

  • सिंचाई के लिए नहरों से पानी का हक सुनिश्चित हो
  • तटबंधों की समय पर मरम्मत की जाए
  • पाइप हटाने से पहले किसानों से बात हो और वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए
  • मानसून से पहले सभी एहतियाती कदम उठाए जाएं

सरकार की लापरवाही भारी न पड़े किसानों पर
सैलजा ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो बाढ़ की तबाही से लाखों किसानों की मेहनत और फसलें बर्बाद हो सकती हैं। सरकार को चाहिए कि वह राजनीतिक प्रचार से पहले ज़मीन पर काम करे और किसानों के हित में ठोस कदम उठाए।

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