नवरात्र के दूसरे दिन मां विंध्यवासिनी धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

  • रिपोर्ट- मंजय वर्मा

मिर्जापुर। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मां विंध्यवासिनी धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मां ब्रह्मचारिणी के रूप में विंध्यवासिनी देवी की आराधना के लिए सुबह से ही श्रद्धालु लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन-पूजन करते नजर आए। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालु निर्बाध रूप से दर्शन कर सकें।

मां ब्रह्मचारिणी का महत्व

नवरात्र के पहले दिन जहां मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान है।

मां ब्रह्मचारिणी सफेद वस्त्र धारण किए, एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में माला लिए हुए विराजमान रहती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी साधकों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं और सभी दुख-कष्ट दूर करती हैं।

भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां ने घोर तपस्या की थी, तभी इन्हें तपस्याचारिणी या ब्रह्मचारिणी कहा गया।

विंध्यवासिनी धाम में विशेष पूजा

विंध्य पर्वत और गंगा तट पर विराजमान मां विंध्यवासिनी का नवरात्र के दूसरे दिन षोडशोपचार विधि से पूजन और जप किया गया। आस्था से परिपूर्ण भक्तों का मानना है कि इस दिन मां की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

भक्तों का तांता और आस्था

देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु नवरात्र के दौरान मिर्जापुर पहुंचे। कई भक्त तो नौ दिनों तक विंध्याचल में रहकर माता की आराधना करते हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि धाम की व्यवस्था संतोषजनक है और प्रशासनिक प्रबंधों से वे संतुष्ट हैं।

 

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