अमृतसर। भारतीय राजनीति के सबसे काले अध्याय—25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल—के 50 वर्ष पूरे होने पर अमृतसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दो बार विधायक, दो बार विधानसभा स्पीकर, दो बार सांसद और लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह अटवाल और भाजपा जिलाध्यक्ष हरविंदर सिंह संधू ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल में यातनाएं सहने वाले योद्धाओं को सम्मानित किया।
कार्यक्रम भाजपा कार्यालय शहीद हरबंस लाल खन्ना स्मारक में आयोजित किया गया, जिसमें अटवाल को भी पुष्पगुच्छ व दोशाला देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इमरजेंसी के दौरान उन्हें 13 महीने 6 दिन तक जेल में रखा गया और इस दौरान उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं।
अटवाल ने कहा, “25 जून 1975 को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान की धारा 352 के अंतर्गत आपातकाल की घोषणा की, तब लोकतंत्र का गला घोंटा गया। यह आपातकाल देश की न्यायपालिका, प्रेस और जनता के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला था।”
उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायबरेली चुनाव में दोषी ठहराते हुए 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। इस फैसले से बौखलाई कांग्रेस सरकार ने सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही कुचल दिया। आपातकाल के दौरान लाखों लोगों को जेल में डाला गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप लगाई गई और न्यायपालिका को कमजोर कर दिया गया।
कार्यक्रम में हरविंदर सिंह संधू ने कहा कि जो कांग्रेस आज संविधान की दुहाई देती है, उसी ने लोकतंत्र को सबसे बड़ा आघात पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हर वर्ष 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाती है ताकि आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र की कीमत और उसकी रक्षा के लिए दिए गए बलिदानों की स्मृति बनी रहे।
चरणजीत अटवाल ने कहा कि कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता उस समय “इंदिरा ही इंडिया” जैसे नारों में दिखती थी और आज भी परिवारवाद की उसी परंपरा को जिंदा रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत संविधान के मार्ग पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रहा है, जबकि कांग्रेस आज भी उसी तानाशाही सोच से बाहर नहीं निकल पाई है।
