ऐलनाबाद: नगर पालिकाओं में पार्षद मनोनीत करके सरकार ने नगरपालिकाओं पर करीब 2 करोड़ रुपए का वार्षिक बोझ बढ़ाया

लोगों द्वारा सरकार के फैसले की निंदा

ऐलनाबाद: ( एम पी भार्गव ): गत दिनों हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार द्वारा प्रदेश के 8 नगर निगमों ,72 नगर पालिकाओं व 19 नगर परिषदों में पार्षद मनोनीत किए गए है‌। हरियाणा सरकार द्वारा जिन नगर निगमों में पार्षद मनोनीत किए गए हैं उनमें यमुनानगर, करनाल, पानीपत, रोहतक, फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर और हिसार में तीन-तीन पार्षदों को मनोनीत किया गया है । इस तरह से इन आठ नगर निगमों में 24 पार्षद सरकार द्वारा मनोनीत किए गए हैं वहीं प्रदेश की 72 नगर पालिकाओं और 19 नगर परिषदों में भी दो से तीन पार्षद मनोनीत किए गए है। सरकार द्वारा मनोनीत किए गए इन पार्षदों के पीछे सरकार की मंशा क्या है यह एक बड़ा सवाल है। सरकार द्वारा मनोनीत किए गए पार्षदों को शहरों में प्रत्येक वार्ड में चुने गए पार्षदों के समान वेतन दिए जाने के लिए एक पत्र भी जारी कर दिया गया है‌। शहर के गणमान्य लोगों ने सरकार के इस फैसले की कड़े शब्दों में निन्दा करते हुए कहा कि चुने गए एक पार्षद को नगर पालिका द्वारा 8000 रुपए प्रति माह मानदेय दिया जाता हैं। अगर मनोनीत किए गए पार्षदों की बात करें तो 72 नगर पालिकाओं में अगर कम से कम दो पार्षद भी मनोनीत किए गए हैं तो उनका आंकड़ा 144 बनता है, इसी तरह सरकार द्वारा 8 नगर निगमों में 24 पार्षद मनोनीत किए गए हैं वही करीब 19 नगर परिषदों में भी 2 से 3 पार्षद मनोनीत किए गए हैं । इस तरह से प्रदेश में सरकार द्वारा करीब 210 पार्षद मनोनीत किए गए हैं। अगर मनोनीत किए गए 210 पार्षदों के मानदेय की बात करें तो इनको प्रत्येक माह 8000 रुपए दिए जाने के लिए सरकार द्वारा पत्र जारी किया गया है। इस तरह से नगरपालिकाओं द्वारा करीब 17 लाख रुपए की राशि प्रत्येक माह इन मनोनीत किए गए पार्षदों को दी जाएगी अगर इसके सालाना आंकड़े की बात करें तो 2 करोड रुपए तक का अतिरिक्त बोझ प्रदेश की नगरपालिकाओं पर पड़ेगा। लोगों का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि अगर एक नगर पालिका के नीचे एक शहर में करीब 15 से 20 पार्षद वार्डों के सुधार के लिए कार्य कर रहे हैं तो क्या वह काफी नहीं है या एक नगर पालिका में मनोनीत किए गए दो पार्षद क्या ज्यादा विकास कार्य करवा पाएंगे। लोगों ने कहा कि सरकार द्वारा अपनी पार्टी से संबंधित अपने कार्यकर्ताओं को केवल मान सम्मान देने के लिए ही यह कदम उठाया गया है लेकिन इस मान सम्मान के बदले सरकार द्वारा प्रत्येक साल करीब 2 करोड रुपए की अदायगी का बोझ नगरपालिकाओं पर डाल दिया गया है। अगर सरकार द्वारा पार्षद मनोनीत नहीं किए जाते तो इन पार्षदों को मानदेय के रूप में दिए जाने वाले क़रीब 2 करोड़ रुपए को प्रदेश में विकास कार्यों पर भी खर्च किया जा सकता था।

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