- रिपोर्ट-मनोज कुमार यादव
देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। राहुल गांधी का कहना है कि हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली संदिग्ध रही है और सत्ता पक्ष के दबाव में काम किया गया।
राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। समर्थकों का जनसैलाब उमड़ पड़ा और सड़कों पर “लोकतंत्र बचाओ” और “सत्ता की चाल नहीं चलेगी” जैसे नारे गूंज उठे। जगह-जगह लोग राहुल गांधी के काफिले का स्वागत करते नजर आए। भीड़ का उत्साह इस बात का संकेत दे रहा था कि जनता में चुनाव आयोग के प्रति आक्रोश और कांग्रेस नेतृत्व के प्रति सहानुभूति दोनों मौजूद हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था के रूप में अपनी विश्वसनीयता खो रहा है और लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर किया जा रहा है। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि राहुल गांधी और विपक्ष अपनी हार छुपाने के लिए ऐसे बहाने बना रहे हैं।
राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा – “जब संस्थाओं पर कब्जा कर लिया जाए और जनता की आवाज दबाई जाए, तब सड़कों पर उतरना ही लोकतंत्र की रक्षा का सबसे बड़ा हथियार होता है। यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं बल्कि पूरे देश की है।”
इस आंदोलन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार और आयोग पर हमलावर है, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल “राजनीतिक नौटंकी” बता रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि देशभर में लोकतंत्र की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है।
यदि यह लहर इसी तरह बनी रही तो आने वाले दिनों में राजनीति का तापमान और भी बढ़ेगा और जनता का गुस्सा सड़कों से संसद तक गूंज सकता है।
