Dussehra 2025: मंदसौर में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि होती है पूजा – जानिए वजह

Dussehra 2025:
देशभर में दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है। इस दिन रावण के पुतले जलाकर अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश दिया जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश का मंदसौर एक ऐसा अनोखा स्थान है, जहां दशहरे पर रावण दहन नहीं किया जाता बल्कि उसकी पूजा की जाती है। इस साल दशहरा 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा

दशहरा हमें यह संदेश देता है कि इंसान को अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करना चाहिए। इसी वजह से देशभर में रावण दहन की परंपरा है। लेकिन मंदसौर इस परंपरा से अलग है।

क्यों होती है रावण की पूजा?

मंदसौर, जिसे पौराणिक काल में दशपुर कहा जाता था, रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था। यही कारण है कि यहां के लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। परंपरा के अनुसार, दशहरे के दिन रावण की पूजा करके ही दहन किया जाता है।

दामाद के रूप में रावण का सम्मान

मंदसौर के नामदेव समाज के लोग रावण को दामाद मानकर पूजते हैं। यहां की महिलाएं घूंघट में रावण की पूजा करती हैं और उसके चरणों में धागा बांधती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है और रोग-शोक दूर होते हैं।

पूजा के बाद होता है दहन

मंदसौर में दशहरे के दिन सुबह ढोल-बाजे के साथ रावण की पूजा की जाती है। इसके बाद शाम को रावण दहन किया जाता है। खास बात यह है कि दहन से पहले यहां के लोग रावण से क्षमा याचना भी करते हैं।

 डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित है।  

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