डीएम बने सहारा: बेसहारा बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, मिला योजनाओं का संबल

रामपुर। कलेक्ट्रेट सभागार में जनता दर्शन के दौरान उस समय भावुक माहौल बन गया, जब जिंदगी की मुश्किलों से जूझ रहे कई परिवार अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के सामने पहुंचे। किसी बच्चे के सिर से पिता का साया उठ चुका था, तो कोई गंभीर बीमारी से जूझते हुए अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित था। ऐसे 10 बेसहारा बच्चों के लिए डीएम एक अभिभावक बनकर सामने आए और उन्हें सरकारी योजनाओं का सहारा देकर नई उम्मीद दी।

ग्राम पनवड़िया के सुखवासी सिंह अपने बेटे मयंक के साथ पहुंचे, जबकि रजपुरा मिलक के भगवान दास अपने बेटे आयुष के भविष्य को लेकर चिंतित दिखे। वहीं सब्बू अपनी मासूम तब्बानूर को लेकर आए। देवेन्द्र कौर अपने दो बेटों के साथ पहुंचीं, जिनके पति के निधन के बाद परिवार पर संकट आ गया था। इन सभी की व्यथा सुनकर जिलाधिकारी ने तुरंत जिला प्रोबेशन अधिकारी को आवश्यक सहायता के निर्देश दिए।

रामपुर निवासी लता की कहानी भी बेहद मार्मिक रही। पति के निधन और खुद की बीमारी के चलते वह अपने बच्चों डिग्गू और काव्या के भविष्य को लेकर परेशान थीं। डीएम ने उन्हें विधवा पेंशन योजना से जोड़ने और बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।

प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा, जिसके तहत उन्हें हर महीने 4000 रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं अन्य जरूरतमंद बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत शामिल कर 2500 रुपये प्रतिमाह सहायता सुनिश्चित की गई।

इस दौरान एक भावुक पल तब आया जब जिलाधिकारी ने खुद बच्चों को बस्ते, कॉपियां और किताबें वितरित कर उनका उत्साह बढ़ाया। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि इन बच्चों तक समय पर योजनाओं का लाभ पहुंचे।

खाली हाथ और नम आंखों के साथ आए ये परिवार जब कलेक्ट्रेट से लौटे, तो उनके चेहरों पर एक नई उम्मीद और भरोसा साफ नजर आ रहा था।

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