पत्र-पत्रिकाओं के अंक पीआईबी कार्यालय में जमा करने एवं सेवा पोर्टल पर डिजिटल फोटो अपडेट करने वाले आदेश को निरस्त करने की मांग

नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी एक आदेश में पत्र-पत्रिकाओं को पीआईबी (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) कार्यालय में नियमित रूप से अंक जमा करने तथा सेवा पोर्टल पर डिजिटल फोटो अपडेट करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश ने लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के संपादकों और पत्रकारों में गहरी असुविधा और चिंता उत्पन्न कर दी है।

देश के अधिकांश जिलों में पीआईबी के कार्यालय मौजूद नहीं हैं, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत छोटे समाचार पत्रों के संचालकों और पत्रकारों के लिए यह नियम अत्यंत कठिनाईपूर्ण साबित हो रहा है। इस आदेश से लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को मानसिक एवं आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश मीडिया संघ ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा है कि सरकार को मीडिया कर्मियों के कार्य को सरल और तनावमुक्त बनाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए, न कि उन्हें जटिल नियमों के जाल में उलझाने का कार्य करना चाहिए। संघ का कहना है कि यदि ऐसे नियम लागू करने भी हों, तो वे केवल बड़े मीडिया हाउस और बहु-संस्करणीय अखबारों पर ही लागू किए जाएं।

लघु एवं मध्यम समाचार पत्र सीमित संसाधनों एवं कम कर्मचारियों के साथ कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उन पर इस प्रकार का अतिरिक्त बोझ डालना अनुचित है। अधिकांश जिलों में संपादक पहले से ही जिला जनसंपर्क कार्यालय में अपने पत्र-पत्रिकाओं की प्रति नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। ऐसे में पीआईबी कार्यालय में पुनः अंक जमा करने और डिजिटल फोटो अपलोड करने का आदेश अनुचित प्रतीत होता है।

पत्रकारों की ओर से मांग की गई है कि जिन पत्र-पत्रिकाओं का पंजीकरण DAVP सूची में है, केवल उन्हीं पर इस प्रकार के आदेश लागू किए जाएं।

डॉ. एम.पी. भार्गव, राज्य सरकार से अधिस्वीकृत पत्रकार, ऐलनाबाद, हरियाणा ने प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी जी से आग्रह किया है कि इस आदेश को शीघ्र निरस्त करने की कृपा करें ताकि लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के संचालकों को मानसिक और आर्थिक परेशानियों से बचाया जा सके।

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