नई दिल्ली। दिल्ली में रिहायशी और कृषि संपत्तियों के सर्किल रेट में जल्द ही बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका सीधा असर रियल एस्टेट बाजार पर पड़ेगा। सरकारी सूत्रों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभिन्न इलाकों में सर्किल रेट 10 से 40 प्रतिशत तक बढ़ाए जा सकते हैं। यह बढ़ोतरी A और H श्रेणी की संपत्तियों को छोड़कर B, C, D, E, F और G कैटेगरी में लागू होने की संभावना है। सर्किल रेट बढ़ने से संपत्ति का रजिस्ट्रेशन महंगा हो जाएगा और खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
दिल्ली सरकार जिलों के पुनर्गठन के बाद सर्किल रेट की लंबे समय से लंबित समीक्षा को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। राजधानी में आखिरी बार रिहायशी और व्यावसायिक संपत्तियों के सर्किल रेट वर्ष 2014 में संशोधित किए गए थे, जबकि कृषि भूमि के सर्किल रेट 2008 के बाद से नहीं बदले गए हैं। इस दौरान बाजार कीमतों में कई गुना इजाफा हो चुका है, जिससे सर्किल रेट और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
क्या होता है सर्किल रेट
सर्किल रेट वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिसे सरकार संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए तय करती है। इसी आधार पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की गणना होती है। सर्किल रेट बढ़ने पर संपत्ति खरीदने की कुल लागत बढ़ जाती है, क्योंकि खरीदार को अधिक टैक्स चुकाना पड़ता है।
सरकार ने गठित की कमिटी
दिल्ली सरकार ने संपत्ति मूल्यांकन की समीक्षा के लिए एक कमिटी का गठन किया है, जिसकी सिफारिशों के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्किल रेट में संशोधन से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी, काले धन पर अंकुश लगेगा और सरकार की राजस्व आय बढ़ेगी। हालांकि, आम खरीदारों के लिए यह बदलाव महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन की कुल लागत में 10 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है।
खेती की जमीन पर ज्यादा असर
कृषि भूमि के सर्किल रेट में प्रस्तावित बढ़ोतरी और भी ज्यादा प्रभाव डाल सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खेती की जमीन के सर्किल रेट में ढाई करोड़ से 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की वृद्धि हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में यह बढ़ोतरी 8 गुना तक बताई जा रही है, खासकर वहां जहां तेजी से शहरीकरण हो रहा है। यह संशोधन करीब 17 साल बाद किया जा रहा है, जिससे भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को बेहतर मुआवजा मिल सकेगा, लेकिन जमीन बेचने पर टैक्स का बोझ भी बढ़ेगा।
श्रेणियों में भी हो सकता है बदलाव
फिलहाल दिल्ली में संपत्तियों को A से H तक आठ श्रेणियों में बांटा गया है, जहां A श्रेणी सबसे महंगी (जैसे लुटियंस दिल्ली) और H सबसे सस्ती मानी जाती है। प्रस्तावित बदलावों के तहत इन श्रेणियों की संख्या बढ़ाकर 24 तक की जा सकती है और ‘A+’ जैसी नई कैटेगरी भी जोड़ी जा सकती है। इससे सर्किल रेट को ज्यादा सटीक और लोकेशन-आधारित बनाया जा सकेगा तथा विभिन्न इलाकों के बीच मूल्य असमानता कम होने की उम्मीद है।
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