Death Anniversary:भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की पुण्यतिथि आज, विवादों से भरे छोटे कार्यकाल में नही लगा कोई दाग

आइए जानते है देश के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बनने के पीछे की कहानी

नई दिल्ली। एक गांधीवादी और ईमानदार नेता थे भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की आज पुण्यतिथि है … इमरजेंसी, जेपी आंदोलन, जनता पार्टी से गुजरते हुए देसाई देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। उनका कार्यकाल छोटा लेकिन विवादित रहा, फिर भी उनकी खुद की छवि पर कोई दाग नहीं लग पाया।

जीवन परिचय
मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के भलसार जिले के भदेली गांव मं हुआ था। उनके पिता रणछोड़जी देसाई भावनगर में एक स्कूल में शिक्षक थे। उनकी मां का नाम वीजाबाई था। मोरारजी देसाई अपने भाई बहनों में सबसे बड़े थे।

शिक्षा
मोरारजी देसाई की प्राथमिक शिक्षा वलसाद और फिर कॉलेज की शिक्षा मुंबई के विल्सन कॉलेज में हुई थी। जिसके बाद वे गुजरात में सिविल सेवा से जुड़े।

व्यक्तिगत जीवन
16 वर्ष की आयु में 1911 में मोरारजी देसाई का विवाह गुजराबेन से हो गया था। उनके पांच बच्चों में से एक बेटी और एक बेटा अभी जीवित है।

राजनीति सफर
मोरारजी देसाई 1930 में कांग्रेस का हाथ थाम फिर उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ काम किया और गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव के बाद अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की शाखा के अध्यक्ष भी बने। 1932 में वे दो साल के लिए जेल भी गए थे। वे मुंबई के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री भी रहे। फिर 1956 में देसाई जवाहरलाल नेहरू सरकार में वित्त मंत्री बने, जहां से उन्होंने 1963 में इस्तीफा दे दिया। 1967 में उन्हें इंदिरा गांधी मंत्रिमंडल में उप प्रधान मंत्री बनाया गया। मोरारजी देसाई पार्टी के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (सिंडिकेट) में शामिल हुए। 1969 में वो कांग्रेस के खिलाफ विपक्ष में चले गए। 1977 में जनता पार्टी की भारी जीत के बाद मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री चुना गया। 1979 में जनता पार्टी के दो और वरिष्ठ सदस्य राज नारायण और चरण सिंह ने देसाई सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, जिसके बाद देसाई को प्रधानमंत्री पद और राजनीति से इस्तीफा देना पड़ा।

उपलब्धियां
मोरारजी देसाई को भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ और पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से सम्मानित किया गया है।

निधन
10 अप्रैल 1995 को मोरारजी देसाई का मुंबई में निधन हो गया था।

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