- संवाददाता – मनोज कुमार यादव
रक्षा बंधन का पावन पर्व नजदीक आते ही बाजारों में मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। यही वह समय होता है जब मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं और इस मौके का फायदा उठाकर आमजन की सेहत से खिलवाड़ करने में लग जाते हैं। नकली खोया, सिंथेटिक दूध, मिलावटी घी और रंगों से बनी मिठाइयाँ त्योहार की मिठास को जहरीला बना देती हैं।
हर साल त्योहारों से पहले मिलावट के मामले सामने आते हैं। मिठाई में मिलाए जाने वाले घटिया गुणवत्ता के तत्व — जैसे डिटर्जेंट मिला दूध, नकली मावे, सिंथेटिक रंग और महकदार केमिकल — लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित होते हैं। इनसे फूड पॉइजनिंग, पेट की बीमारियां, लिवर और किडनी पर असर जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
प्रशासनिक दावे तो हर साल किए जाते हैं कि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। मिठाई की दुकानों पर नमूनों की जांच होगी, दोषी दुकानदारों पर कार्रवाई होगी, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इससे उलट होती है।
ज्यादातर जांच सिर्फ कुछ दुकानों तक ही सीमित रहती है,
लोगों को जागरूक करने के लिए कोई व्यापक अभियान नहीं चलता। आमजन को यह तक पता नहीं होता कि वह मिलावट की शिकायत कहां करें।
कई बार अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत भी सामने आती है, जिससे जांच अभियान औपचारिक बनकर रह जाते हैं।
रक्षा बंधन केवल एक त्योहार नहीं, एक भावनात्मक बंधन का प्रतीक है। इस पवित्र अवसर पर यदि बहनों को भाईयों के हाथों मिलावटी मिठाई मिलती है, तो वह प्रेम नहीं, बीमारी लेकर आती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह सिर्फ कागजों में नहीं, ज़मीनी स्तर पर भी सख्ती दिखाए, ताकि त्योहार की मिठास शुद्ध और सुरक्षित बनी रहे।
