CM Yogi on EVM:  विपक्ष को सीएम योगी की दोटूक, बोले- चुनाव हारने पर मशीन को दोष देना बंद करे विपक्ष

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi on EVM) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल चुनाव जीतने पर अपनी मेहनत और राजनीतिक रणनीति का श्रेय लेते हैं, लेकिन जब जनता उन्हें नकार देती है तो हार का ठीकरा ईवीएम और चुनाव आयोग पर फोड़ने लगते हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष को ईवीएम की विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं है, तो उसी व्यवस्था से चुनाव जीतने के बाद उसके नेता संसद में शपथ क्यों लेते हैं?

योगी आदित्यनाथ ने ये बातें 4 नवंबर को गोरखपुर में आयोजित एनडीए की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान कहीं। इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री संजय निषाद सहित एनडीए के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ईवीएम विवाद, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास और संवैधानिक संस्थाओं पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर विपक्ष को घेरा।

CM Yogi on EVM: चुनाव हारने पर EVM को दोष देने का लगाया आरोप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों की चुनावी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई राजनीतिक दल चुनाव जीतता है तो वह अपनी मेहनत और जनता के समर्थन को जीत का कारण बताता है। लेकिन चुनाव में हार मिलने पर वही दल ईवीएम पर सवाल उठाने लगता है।

उन्होंने कहा कि जनता जब किसी पार्टी को उसके कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर नकार देती है, तो उसे अपनी कमियों का विश्लेषण करना चाहिए। चुनाव परिणामों के बाद लगातार ईवीएम को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। योगी ने इसे विपक्ष की आदत बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संदर्भ में भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि कांग्रेस और उसके नेता ईवीएम को गलत मानते हैं, तो राहुल गांधी उसी ईवीएम से चुनाव जीतने के बाद लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ क्यों लेते हैं? उनके इस बयान को विपक्ष की ईवीएम संबंधी आपत्तियों पर सीधा राजनीतिक पलटवार माना जा रहा है।

CM Yogi on EVM: SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर भी साधा निशाना

योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया देश में पहली बार नहीं हो रही है। समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि अतीत में भी कई बार यह प्रक्रिया अपनाई गई और इनमें से अधिकतर अवसर कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में आए थे।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जब मतदाता सूची को अपडेट करने और उसमें अपात्र नामों की जांच करने की प्रक्रिया चलाता है, तो विपक्षी दल इसका विरोध शुरू कर देते हैं। उनके अनुसार, मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों और विदेशी नागरिकों के नाम बने रहने से चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता प्रभावित हो सकती है।

योगी ने कहा कि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों, पाकिस्तानी नागरिकों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यदि मतदाता सूची में अपात्र लोगों के नाम बने रहते हैं तो इससे गरीबों, दलितों और वंचित वर्गों के वास्तविक मताधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने विपक्ष से इस विषय पर राजनीति करने के बजाय मतदाता सूची को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।

CM Yogi on EVM: कांग्रेस और INDIA गठबंधन से देश से माफी मांगने की मांग

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव लड़ने और सरकार बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है।

योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों से अपने रवैये पर विचार करने और जनता से माफी मांगने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठाकर देश में अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। राजनीतिक दलों को अपने चुनावी हितों से ऊपर उठकर इन संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

हालांकि, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की ओर से उठाई जा रही आपत्तियां भी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और गलत तरीके से नाम हटाए जाने की आशंकाओं से जुड़ी हैं। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है।

CM Yogi on EVM: 1975 की इमरजेंसी का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए 1975 में लगाए गए आपातकाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने देश में आपातकाल लगाया था, वह आज लोकतंत्र की रक्षा की बात कर रही है।

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि क्या वे 1975 की इमरजेंसी के लिए देश की जनता से माफी मांगेंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए थे। उनके अनुसार, उस समय पुलिस कार्रवाई, संपत्तियों की जब्ती और हिरासत में लोगों की मौत जैसी घटनाएं हुई थीं।

योगी ने कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र पर चर्चा करने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण और विवादित अध्याय बताते हुए विपक्ष को इस पर जवाब देने की चुनौती दी।

CM Yogi on EVM: 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली को लेकर सवाल उठाए।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन देश उस हिंसा में मारे गए लोगों को याद कर रहा था और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहा था, उसी समय कांग्रेस के नेता दिल्ली में राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने इसे पीड़ित परिवारों की भावनाओं से जोड़ते हुए कांग्रेस से सवाल किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने इतिहास और उससे जुड़े सवालों पर जवाब देना चाहिए।

यह मुद्दा भी कांग्रेस और भाजपा के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। योगी ने अपने संबोधन में इन घटनाओं का उल्लेख करके कांग्रेस के लोकतंत्र संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए।

CM Yogi on EVM: लोकसभा चुनाव के  आंकड़े गिनाकर विपक्ष को दिया जवाब

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 44 सीटें, 2019 में 52 सीटें और 2024 में 99 सीटें मिली थीं।

मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों को जोड़ते हुए कहा कि तीन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की कुल सीटें 195 रहीं, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले 240 सीटें हासिल की थीं। उन्होंने इन आंकड़ों के जरिए विपक्ष के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाया।

योगी ने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए। यदि किसी पार्टी को चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलती है, तो उसे अपनी नीतियों, संगठन और जनता से जुड़ाव की समीक्षा करनी चाहिए। केवल ईवीएम या चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने से राजनीतिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

CM Yogi on EVM: उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनाव का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन की तुलना करते हुए विपक्ष पर जनता के जनादेश का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव परिणाम जनता की इच्छा को दर्शाते हैं और राजनीतिक दलों को इस फैसले को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से अपनी चुनावी हार के कारणों पर आत्ममंथन करने की बात कही।

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची, ईवीएम और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक बहस का महत्व और बढ़ गया है। भाजपा और विपक्षी दल आगामी चुनावों से पहले इन मुद्दों पर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

CM Yogi on EVM: छात्र का उदाहरण देकर विपक्ष पर कसा तंज

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों के चुनावी रवैये को समझाने के लिए एक छात्र का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी परीक्षा में बार-बार असफल होता है और हर बार अपनी असफलता के लिए किसी दूसरे को जिम्मेदार ठहराता है, तो इससे उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

योगी के अनुसार, ऐसे विद्यार्थी को अपनी तैयारी और कमियों का विश्लेषण करना चाहिए। इसी तरह राजनीतिक दलों को भी चुनाव में हार मिलने पर अपनी रणनीति और कामकाज की समीक्षा करनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी कमियों पर विचार करने के बजाय ईवीएम, एसआईआर और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और राजनीतिक दलों को उसका सम्मान करना चाहिए।

CM Yogi on EVM: समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर भी उठाए सवाल

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के समय प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं अधिक थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में सुरक्षा, सुशासन और विकास को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है।

यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की राजनीतिक रणनीति से भी जुड़ा है। पार्टी कानून-व्यवस्था और विकास को अपने प्रमुख मुद्दों के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष सरकार के कामकाज और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।

CM Yogi on EVM: लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा में NDA नेताओं की मौजूदगी

गोरखपुर में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, मंत्री संजय निषाद और अन्य नेताओं की मौजूदगी रही।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह पदयात्रा केवल किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और देश में विकास के संकल्प को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और जनता को भ्रमित करने के आरोप लगाए। वहीं विपक्षी दलों की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

CM Yogi on EVM: EVM और SIR पर सियासी बहस के बीच 2027 चुनाव की तैयारी

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ईवीएम और मतदाता सूची का मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।

भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है। वहीं विपक्ष की ओर से यह मांग उठाई जा रही है कि पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम किसी भी स्थिति में गलत तरीके से न हटाए जाएं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर की पदयात्रा में विपक्ष को ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के बजाय अपनी चुनावी रणनीति की समीक्षा करने की सलाह दी। उन्होंने कांग्रेस से आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी जवाब मांगा।

फिलहाल ईवीएम, एसआईआर और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने रह सकते हैं।

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