रिपोर्ट: मनोज यादव
एटा:- भारत की समुद्री सीमाएं और बंदरगाह केवल व्यापार और वाणिज्य के केन्द्र नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक भू-राजनीतिक समीकरणों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के भी धुरीबिंदु हैं। समुद्री तस्करी, साइबर-घुसपैठ, आतंकवादी घुसपैठ और संवेदनशील माल की चोरी जैसे बहुआयामी जोखिमों के मद्देनज़र बंदरगाह सुरक्षा का पारंपरिक ढांचा अब अपर्याप्त माना जाने लगा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने डिजिटल-हाइब्रिड पोर्ट सिक्योरिटी मॉडल का सूत्रपात किया है, जो बंदरगाह सुरक्षा की परिभाषा को एक नए युग में प्रवेश कराता है।
यह मॉडल केवल मानव-आधारित सुरक्षा प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर-सर्विलांस, डेटा एनालिटिक्स, फेस रिकग्निशन बायोमेट्रिक्स, ड्रोन-इंटीग्रेटेड पेट्रोलिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित निगरानी तंत्र जैसी परिष्कृत तकनीकों को अंतर्समाहित किया गया है। परिणामस्वरूप, बंदरगाह सुरक्षा अब केवल गश्ती और चौकसी का मामला न रहकर पूर्वानुमानित खतरे की पहचान (Predictive Threat Mapping) और तत्काल प्रतिक्रिया (Real-Time Response Mechanism) का विज्ञान बन चुकी है।
निजी सुरक्षा कंपनियों के सुरक्षाकर्मियों को भी CISF द्वारा इस डिजिटल प्रतिमान के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि पब्लिक-प्राइवेट सिक्योरिटी सिंक्रोनाइज़ेशन के माध्यम से सुरक्षा का बहुपरत (Multi-Layered) ढांचा तैयार हो सके। इससे सुरक्षा संरचना केवल केंद्रीकृत नियंत्रण तक सीमित न रहकर विकेंद्रीकृत और तकनीक-समर्थित नेटवर्किंग में रूपांतरित हो रही है।
विशेष उल्लेखनीय यह है कि यह मॉडल पोर्ट साइबर डिफेंस आर्किटेक्चर को भी मजबूती प्रदान करता है। बंदरगाह अब केवल भौतिक अवसंरचना नहीं रहे, बल्कि वे “डिजिटल इकोसिस्टम” बन चुके हैं—जहाँ कार्गो मूवमेंट, कस्टम क्लियरेंस और लॉजिस्टिक्स पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हैं। अतः किसी भी साइबर-हस्तक्षेप की संभावना सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा पर आघात बन सकती है। CISF का डिजिटल मॉडल इस खतरे को पूर्व-निषेधात्मक रूप से निष्प्रभावी करने की क्षमता रखता है।
सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल भारत को वैश्विक समुद्री परिदृश्य में अधिक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करेगी। जहाँ विश्व के विकसित बंदरगाह पहले ही स्मार्ट पोर्ट सिक्योरिटी मॉडल को अपना चुके हैं, वहीं भारत का यह कदम उसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानदंडों की पंक्ति में खड़ा करता है।
थर्मल पावर प्लांट एटा की सुरक्षा में तैनात CISF के डिप्टी कमांडेंट जसवीर सिंह ने बताया कि CISF का यह डिजिटल सुरक्षा अध्याय न केवल बंदरगाहों को बाहरी और आंतरिक दोनों खतरों से सुरक्षित करने का प्रयास है, बल्कि यह भारतीय सुरक्षा सोच के एनालॉग युग से डिजिटल-सुरक्षा सभ्यता की ओर संक्रमण का भी प्रतीक है। यह कहा जा सकता है कि यह पहल भारत के समुद्री व्यापारिक भविष्य को न केवल संरक्षित करेगी, बल्कि उसे और अधिक आत्मनिर्भर, सक्षम और प्रतिस्पर्धात्मक भी बनाएगी।
