जल जीवन मिशन में नियम बदलने से 16,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत

  •  रिपोर्ट: मंजय वर्मा 

नई दिल्ली: सरकारी महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन में वर्ष 2022 में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव के कारण केंद्र सरकार को लगभग ₹16,000 करोड़ की अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ा है।

वर्ष 2019 में जब जल जीवन मिशन की शुरुआत हुई थी, तब इसके दिशानिर्देशों में “टेंडर प्रीमियम” को अस्वीकृत व्यय की श्रेणी में रखा गया था, अर्थात् राज्य सरकारें यदि अनुमोदित लागत से अधिक दरों पर ठेके देती हैं, तो उस अतिरिक्त राशि को केंद्र वहन नहीं करेगा।

लेकिन जून 2022 में किए गए बदलाव के बाद इसे स्वीकार्य बना दिया गया, जिससे राज्य सरकारों ने बढ़ी दरों पर ठेके देना शुरू कर दिया।

सबसे बड़ा मामला मध्य प्रदेश में
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन की 508 योजनाओं में यह अंतर साफ देखा गया। यहां की परियोजनाओं की अनुमानित लागत ₹42,616 करोड़ थी, लेकिन ठेके दिए गए ₹53,381 करोड़ में — यानी करीब ₹10,764 करोड़ की अधिकता।

महत्वपूर्ण तथ्य:
देशभर में कुल 1,03,093 योजनाओं में से 14,586 योजनाओं में ठेके लागत अनुमान से अधिक दरों पर दिए गए।

इनमें प्रमुख राज्य हैं:

मध्य प्रदेश – 508 योजनाएं

महाराष्ट्र – 4,553 योजनाएं

छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में भी अनेक योजनाएं प्रभावित हुईं।

जल शक्ति मंत्रालय की सफाई
मंत्रालय ने इस बढ़ोतरी का कारण कोविड महामारी के बाद निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि बताया है।

लेकिन “द इंडियन एक्सप्रेस” की विशेष जांच से यह सामने आया कि कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी नियमों में बदलाव के बाद ही हुई, जिससे संदेह उत्पन्न होता है कि यह बदलाव कुछ खास कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए तो नहीं किया गया था।

जल जीवन मिशन का उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर को नल से जल उपलब्ध कराना है, लेकिन इस पर आ रहे अतिरिक्त खर्च से सरकार की वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करती है और क्या जनता के पैसों की हिफाज़त के लिए जवाबदेही तय की जाएगी या नहीं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.