सर्वाइकल कैंसर: महिलाओं के लिए बढ़ती खतरे की चेतावनी और बचाव के उपाय

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं। हर आठ मिनट में एक महिला अपनी जान इस बीमारी के कारण खो देती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में महिलाएं इस बीमारी और इसके लक्षणों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखतीं, जिससे समय पर इलाज न होने पर गंभीर परिणाम सामने आते हैं।

सर्वाइकल कैंसर क्या है?
डॉ. सुमोल रत्ना (सहायक प्रोफेसर, एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज, ग्रेटर नोएडा) के अनुसार, यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से सर्विक्स में होता है। जब सर्विक्स की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो यह धीरे-धीरे कैंसर में बदल जाती हैं। शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।

मुख्य कारण:

एचपीवी वायरस (HPV Virus) – सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण।

कम उम्र में शारीरिक संबंध – शुरुआती उम्र में यौन संबंध होने पर खतरा बढ़ता है।

एक से अधिक साथी – वायरस फैलने की संभावना बढ़ जाती है।

साफ‑सफाई की कमी और संक्रमण – योनि की उचित सफाई न होने पर जोखिम बढ़ता है।

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता – शरीर वायरस से लड़ नहीं पाता।

धूम्रपान – सिगरेट पीने से जोखिम बढ़ता है।

लक्षण:

पीरियड्स के बीच में खून आना

शारीरिक संबंध के बाद खून आना

बहुत ज्यादा या असामान्य रक्तस्राव

बदबूदार या पानी जैसा डिस्चार्ज

बच्चे दानी के आसपास दर्द या दबाव

कमर या पीठ में लगातार दर्द

थकावट, कमजोरी या बिना कारण वजन गिरना

पता लगाने की जांच:

पैप स्मीयर टेस्ट: सर्विक्स की कोशिकाओं में बदलाव का पता।

एचपीवी टेस्ट: शरीर में वायरस की मौजूदगी का पता।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उपाय:

एचपीवी वैक्सीन – 9 से 45 साल की महिलाओं के लिए।

नियमित जांच – 21 साल से ऊपर की हर महिला को 3–5 साल में एक बार पैप स्मीयर टेस्ट।

सुरक्षित शारीरिक संबंध – सिर्फ एक साथी के साथ।

साफ‑सफाई – निजी अंगों और पीरियड्स में स्वच्छता।

धूम्रपान से बचें।

इलाज:

शुरुआती अवस्था – छोटी सर्जरी, प्रभावित हिस्से को हटाना।

बीच की अवस्था – सर्जरी के साथ रेडियोथेरेपी/कीमोथेरेपी।

गंभीर अवस्था – रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और लक्षण कम करने वाली दवाइयां।

महिला, परिवार और समाज की भूमिका:

समय-समय पर जांच कराएं और बेटियों को एचपीवी वैक्सीन के बारे में जानकारी दें।

शरीर में बदलाव को अनदेखा न करें।

डर या संकोच के कारण इलाज न टालें।

सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर सर्वाइकल कैंसर से जीवन बचाया जा सकता है। जांच, वैक्सीन और सुरक्षित जीवनशैली अपनाकर लाखों महिलाओं की जानें सुरक्षित की जा सकती हैं।

 

khabre junction 

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें

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