Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलने के बाद से ही सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बना रहा और जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, गिरावट और गहरी होती चली गई। निफ्टी करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 23,255 के आसपास पहुंच गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स भी लगभग 637 अंक टूटकर 74,265 के स्तर पर आ गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर दिखाई दिया। खास तौर पर मेटल शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली।

शेयर बाजार में अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी दर्ज की गई। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 483 लाख करोड़ रुपये से घटकर लगभग 478 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया। यानी बाजार की गिरावट के दौरान निवेशकों की संपत्ति में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट

शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार पर शुरुआत से ही दबाव दिखाई दिया। सेंसेक्स में करीब 637 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 74,265 के आसपास कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर निफ्टी भी करीब 1 फीसदी टूटकर 23,255 के स्तर के आसपास पहुंच गया।

बाजार में बिकवाली किसी एक-दो शेयरों तक सीमित नहीं रही। कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से पैसा निकालने की कोशिश की, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।

खास तौर पर मेटल सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके अलावा अमेरिका से जुड़े आर्थिक आंकड़ों ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाला।

निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये कम हुए

शेयर बाजार में किसी बड़ी गिरावट का सीधा असर कंपनियों के मार्केट कैप और निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ता है। शुक्रवार को भी यही देखने को मिला।

बीएसई का कुल मार्केट कैप करीब 483 लाख करोड़ रुपये के आसपास था, जो गिरावट के दौरान घटकर लगभग 478 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह बाजार पूंजीकरण में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि बाजार पूंजीकरण में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों के बैंक खातों से सीधे 5 लाख करोड़ रुपये निकल गए। शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो का मूल्य भी घट गया।

इन दिग्गज शेयरों पर पड़ा दबाव

सेंसेक्स में शामिल कई बड़े शेयर शुक्रवार को लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा स्टील में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयर भी बिकवाली के दबाव से अछूते नहीं रहे।

मेटल सेक्टर में भी कमजोरी ज्यादा दिखाई दी। हिंदुस्तान कॉपर और हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में करीब 4 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। वहीं लोधा डेवलपर्स, कोचीन शिपयार्ड और गोदरेज प्रॉपर्टीज जैसे शेयरों में भी दबाव बना रहा।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब बड़े और प्रमुख शेयरों में एक साथ बिकवाली होती है तो उसका असर पूरे इंडेक्स पर पड़ता है। यही वजह रही कि शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली।

आखिर क्यों अचानक टूटा शेयर बाजार?

भारतीय शेयर बाजार की शुक्रवार की गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिका से आए महंगाई के मजबूत आंकड़े और विदेशी निवेशकों की बिकवाली प्रमुख कारण रहे।

1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

महंगे कच्चे तेल का असर कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है। इससे निवेशकों में चिंता बढ़ती है और वे बाजार में जोखिम कम करने के लिए बिकवाली कर सकते हैं।

2. अमेरिका में महंगाई के मजबूत आंकड़े

बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव अमेरिका से आए महंगाई से जुड़े आंकड़ों का रहा। मजबूत महंगाई के आंकड़ों से यह आशंका बढ़ी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी लाने के बजाय सख्त रुख बनाए रख सकता है।

अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है। निवेशक सुरक्षित और अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इसका दबाव उभरते बाजारों पर भी देखने को मिलता है।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट को और कमजोर किया।

जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में बड़ी मात्रा में बिकवाली करते हैं, तो बाजार में उपलब्ध शेयरों की बिक्री बढ़ जाती है। इससे कीमतों पर दबाव बनता है और घरेलू निवेशकों के बीच भी सतर्कता बढ़ सकती है।

मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

शुक्रवार के कारोबार में मेटल सेक्टर खास तौर पर दबाव में रहा। हिंदुस्तान कॉपर और हिंदुस्तान जिंक जैसे शेयरों में करीब 4 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। मेटल कंपनियों के प्रदर्शन पर वैश्विक कमोडिटी कीमतों, मांग और आर्थिक गतिविधियों का असर पड़ता है।

इसके अलावा कई अन्य सेक्टर के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। रियल एस्टेट, शिपिंग और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। इससे बाजार में चौतरफा कमजोरी का माहौल बना।

आगे बाजार के लिए क्या रहेगा अहम?

अब निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों, अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। अगर वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और कच्चा तेल महंगा रहता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

वहीं, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है, तो घरेलू बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।

शुक्रवार की गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि शेयर बाजार पर वैश्विक घटनाओं और आर्थिक आंकड़ों का कितना तेज असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश संबंधी फैसले सोच-समझकर लें और केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर जल्दबाजी में निर्णय न लें।

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