Birth Anniversary: हिंदी म्यूजिक इंडस्ट्री के महान गायकों में से एक थे मन्ना डे, लगभग 4000 गानों को दी अपनी सुरीली आवाज

'लागा चुनरी में दाग' और 'एक चतुर नार' जैसे कई प्रसिद्ध गानों को दी अपनी आवाज

नई दिल्ली।। हिंदी म्यूजिक इंडस्ट्री के महान गायकों में से एक मन्ना डे की आज जयंती है। गाने की उनकी अनोखी शैली उन्हें बाकी गायकों से अलग करती थी। ‘लागा चुनरी में दाग’, ‘एक चतुर नार’ ‘बाबू समझो इशारे’ गाने से उनकी गायिकी का अंदाजा लगाया जा सकता है। पांच दशकों के अपने करियर में उन्होंने बंगाली, गुजराती, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और असमी भाषा में लगभग 4000 गाने गाएं…

जीवन परिचय
मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 में कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनका पूरा नाम प्रबोध चन्द्र डे था। इनके पिता जी का नाम पूरन चन्द्र डे था और माता जी का नाम महामाया था।

शिक्षा
मन्ना डे ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा इन्दु बाबुर पाठशाला से पूरी की इसके बाद स्कॉटिश चर्च कॉलेज में दाखिला लिया और यही से अपनी पढाई की पढाई के दौरान उन्हें कुश्ती और मुक्केबाजी का भी शौक रहा और कुश्ती और मुक्केबाजी से जुडी प्रतियोगिता में हमेशा भाग लेते थे। मन्ना डे ने स्नातक की शिक्षा कोलकाता के ‘विद्यासागर कॉलेज’ से पूरी की। मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा के सी डे से हासिल की।

व्यक्तिगत जीवन
मन्ना डे का विवाह 18 दिसम्बर 1953 में सुलोचना कुमारन से हुयी जो केरल की थी। उन्हें दो पुत्रियां हुई- शुरोमा और सुमिता ।

करियर
मन्ना डे ने अपना पहला गाना 1943 में फ़िल्म “तमन्ना” में गया जिसे संगीत से सजाया था कॄष्णचंद्र डे ने और इस गाने में साथ थी सुरैया जी। लेकिन शुरूआती दौर में इन्होने फ़िल्म ‘रामराज्य’ में कोरस किया था। इसके बाद 1950 में आई फिल्म “मशाल” एकल गीत गया जिसके बोल थे “ऊपर गगन विशाल” ।
उपलब्धियां
मन्ना डे को फ़िल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार और भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म श्री सहित कई अन्य प्रमुख पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

निधन
मन्ना डे का निधन 24 अक्टूबर 2013 को हो गया था।

 

 

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