बदायूँ: हिंदी पत्रकारिता दिवस पर बदायूँ में पत्रकारों और पूर्व सैनिकों को किया गया सम्मानित
पत्रकारिता की चुनौतियों पर हुई गंभीर चर्चा, वरिष्ठ पत्रकारों और शहीद परिवारों को मिला सम्मान
बदायूँ: दिल्ली पब्लिक स्कूल में विभिन्न पत्रकार संगठनों द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारिता की चुनौतियों पर व्याख्यान और गोष्ठी हुई, जिसमें कई प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया। 135 से अधिक वरिष्ठ पत्रकारों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों को सत्य, निर्भीकता और सामाजिक दायित्व के साथ कार्य करने का संदेश दिया गया।
पत्रकारों की भूमिका पर वक्ताओं के विचार
राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने कहा, “पत्रकार अगर कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करें तो वे समाज में बदलाव ला सकते हैं। नगर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने कहा, “पत्रकार की कलम में समाज में परिवर्तन की ताकत होती है। वरिष्ठ संपादक कामना हजेला ने पत्रकारिता को वर्तमान समय में एक बड़ी चुनौती बताया और युवा पत्रकारों की सहभागिता की सराहना की। साहित्यकार अशोक खुराना ने मीडिया में सामंजस्य और सकारात्मक संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा – “चश्मा हो यदि सत्य का, और ह्रदय सुविचार। निकलेगा निष्कर्ष फिर, बेहतर ही हर बार।।”
कार्यक्रम का आयोजन और संचालन
कार्यक्रम में डीपीएस बदायूँ के डायरेक्टर संदीप भारती ने सभी पत्रकारों का तिलक व पटका पहनाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम संचालन रविंद्र मोहन सक्सेना ने किया और आयोजन में सचिन भारद्वाज, विवेक खुराना, अबरार अहमद, संजीव सक्सेना, ठाकुर वेदपाल सिंह, अजय गुप्ता समेत कई पत्रकार संगठन शामिल रहे। वरिष्ठ पत्रकारों और
पूर्व सैनिकों का हुआ सम्मान
50 वर्ष से अधिक आयु के 135 वरिष्ठ पत्रकारों को उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही, भारतीय सेना के शौर्य पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों को भी श्रद्धा और सम्मान अर्पित किया गया।
कार्यक्रम ने पत्रकारिता की सत्यनिष्ठ परंपरा को सहेजते हुए नई पीढ़ी के पत्रकारों को प्रेरणा दी। वक्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है और चुनौतियों से घबराने के बजाय सत्य के साथ खड़ा होना ही असली पत्रकारिता है। यह आयोजन बदायूँ जनपद में पत्रकारों की एकजुटता और सकारात्मक पहल का प्रतीक बन गया।
