दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता पर हमला- कहा थे सुरक्षा कर्मचारी?

ग़ुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा- पवन कुमार बंसल

हमारे जागरूक पाठक सतीश मेहरा के सौजन्य से .. हरियाणा की बेटी..दिल्ली की‌ सीएम पर हमला हुआ। कहां थे सुरक्षा कर्मी और सीसीटीवी कैमरे

हरियाणा की बेटी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जानलेवा हमले की घटना की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। निश्चित रूप से यह एक घिनौना कार्य है। रेखा गुप्ता पर जानलेवा हमला तब हुआ जब वे अपने ही आवास पर जनसुनवाई कर रही थी। बताया जा रहा है कि इस समय जनसुनवाई के दौरान 150 से 200 व्यक्ति थे जो अपनी अपनी शिकायतें व समस्याओं से मुख्यमंत्री दिल्ली को अवगत करवा रहे थे। जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री लोगों की शिकायतें सुन रहा हो तब तो इस प्रकार का जानलेवा हमला करना बेहद ही संगीन हो जाता है। इस हमले में गुजरात के राजकोट निवासी राजेशभाई खोमजी को गिरफ्तार किया गया है। विभिन्न खबरी चैनलों व समाचार पत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को हमलावर द्वारा 1 मिनट 20 सेकंड तक यानी 80 सेकंड तक घसीटा गया, जिससे मुख्यमंत्री को कई जगह पर चोटें भी आई हैं।
सीएम की सुरक्षा की बात की जाए तो केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मुख्यमंत्री को “जेड “श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है और वही ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास है । इस ‘जेड’ श्रेणी में 22 से 25 तक सुरक्षाकर्मी होते हैं ।इनमें दो एस्कॉर्ट और 8 हथियारबंद गार्ड रहते हैं, जो मुख्यमंत्री के एक एक विशेष घेरे में रखते हैं। ये सुरक्षा गार्ड किसी प्रकार का हमला होने पर बिना कोई देरी किए पलभर में ही एक्शन में आते हैं और हमलावर को तुरंत दबोच लिया जाता है। यहां हमलावर मुख्यमंत्री को 80 सेकंड तक का घसीटता रहा और मारपीट की। ऐसे में ‘जैड’ टाइप की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। अभी तक किसी चैनल पर मुख्यमंत्री पर हुए हमले का वीडियो भी नहीं आया है, जिससे अंदाज़ा लगाए जा सके की हमलावर ने किस प्रकार से घटना को अंजाम दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री के आवास पर निगरानी के लिए और सुरक्षा उद्देश्य से जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और जन सुनवाई के दौरान तो दिल्ली सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाती है ताकि इस प्रकार के जनसुनवाई के कार्यक्रम को मीडिया और प्रेस में प्रसारित किया जा सके। अव्वल तो इस प्रकार के कार्यों में मीडिया को भी इनवाइट किया जाता है लेकिन यह माने की किसी मीडिया चैनल को इनवाइट नहीं किया गया तो ए एन आई जो एक एजेंसी है उसे तो बुलाया ही जाता है। मान लिया जाए की जनसुनवाई के कार्य में कोई भी वीडियो ग्राफर पर नहीं था तो वहां उपस्थित डेढ़ सौ 200 लोगों में से लगभग सभी के पास मोबाइल कैमरे थे जिन्होंने इस हमले का वीडियो भी बनाया होगा आज कहीं भी किसी प्रकार की छोटी सी छोटी घटना हो और कोई व्यक्ति देख रहा हो तो वह अपने मोबाइल कैमरे में कैद करने की कोशिश करता है लेकिन यह घटना एक छोटी घटना नहीं थी बल्कि यह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हरियाणा की बेटी पर हमला था। हरियाणा के लोगों को अब विश्वास नहीं हो रहा की सुरक्षा एजेंसियों से उनकी सुरक्षा में कहां चूक हुई है। यह बात हरियाणा के लोग सहन नहीं कर सकते कि उनकी बेटी पर इस प्रकार से हमला हो जाए और सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद ना हों। इससे सुरक्षा एजेंसियों व सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल बनता है।

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