केकई के कहने पर महाराजा दशरथ ने श्रीराम को दिया 14 वर्षों का वनवास
श्री ब्राह्मण महासभा के पूर्व अध्यक्ष जगदीश चोटिया ने की श्री श्याम बाबा की आरती
ऐलनाबाद, 28 सितंबर ( एम पी भार्गव ) शहर के श्री गौशाला मार्ग पर स्थित श्री रामलीला कमेटी के बैनर तले वृंदावन से आये कलाकारों की भव्य श्रीरामलीला पांचवे दिन भी जारी रही। मध्यरात्रि तक चली श्री रामलीला को देखने हज़ारों महिला पुरुष दर्शक पहुंचे। पांचवे दिन की श्रीरामलीला के प्रारंभ में स्थानीय श्री ब्राह्मण महासभा के पूर्व अध्यक्ष व शर्मा स्वीट्स के संचालक जगदीश चोटिया, उनके साथियों धर्मपाल शास्त्री, राजेश शर्मा व नरेंद्र गिदडा तथा कमेटी के सदस्यों ने सामुहिक रूप से ने श्री श्याम बाबा की आरती की। श्रीरामलीला कमेटी के निदेशक त्रिलोक जोशी व कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने अतिथियों का माला व श्रीरामनाम का पटका पहनाकर स्वागत किया। श्रीरामलीला कमेटी की ओर से अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर भी सम्मानित किया गया। श्रीरामलीला के प्रारंभ में अयोध्या के महाराजा दशरथ पूरे राज्य में अपने बड़े राजकुमार श्रीराम के राजतिलक की मुनियादी करवाते हैं जिसे सुनकर वहां के लोग बहुत खुश होते हैं लेकिन महाराजा दशरथ की पत्नी कैकेई की दासी मंथरा यह खबर सुनकर बुरी तरह से परेशान हो जाती है। इधर, महारानी कैकई राजकुमार श्रीराम के राजतिलक की खबर सुनकर बहुत खुश दिखाई देती है। इस खुशी में वह अपने आप को तथा राजमहल को सजा संवार रही है। दासी मंथरा कैकेई के पास जाकर राजकुमार श्रीराम के स्थान पर अपने बेटे राजकुमार भरत को राजतिलक दिलवाने तथा श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास दिलवाने के लिए भड़काती है। थोड़ी देर ना-नुकुर के बाद कैकई भी अपनी दासी मंथरा की बातों में आकर कोप भवन में जाकर लेट जाती है। जब राजा दशरथ वहां पहुंचते हैं तो राजमहल में सन्नाटा देखकर हैरान रह जाते है। वह कैकेई से मिकते है तो कैकेई रो-रो करके उनको रघुकुल की आन का वास्ता देकर उनसे दो वरदान मांगती है।
पहले वरदान में वह अपने बेटे राजकुमार भरत का राज्याभिषेक करने और दूसरे वरदान में श्रीराम को 14 वर्षों के लिए वनवास भेजने की मांग करती हैं। अपने वचनों में बंधे महाराजा दशरथ रानी कैकेई की मांग पर बहुत परेशान होते हैं लेकिन उसको दोनो वरदान दे देते है। वे अपने पुत्र श्रीराम को बुलाकर उन्हें 14 वर्षों के लिए वनवास जाने का आदेश देते हैं। जिसे श्रीराम सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं और वन जाने की तैयारी शुरू कर देते है। इसी बीच उनकी धर्मपत्नी सीता व अनुज भ्राता लक्ष्मण भी श्रीराम के साथ वन जाने की जिद करते हैं। श्रीराम उन्हें वन के कठिन जीवन के बारे में बताकर उन्हें अपने साथ ले जाने से मना करते हैं लेकिन उन दोनों की जिद के आगे श्रीराम को भी झुकना पड़ा। श्री राम उन दोनों को अपने साथ वन ले जाने के लिए तैयार हो गए। वे अपनी माता कौशल्या व सुमित्रा को पिताश्री के आदेश पर वन गमन की जानकारी देते हैं। माता कौशल्या व माता सुमित्रा भी भारी मन से श्रीराम, सीता व लक्ष्मण को वन जाने की अनुमति दे देती है। श्रीराम, सीता और लक्ष्मण तीनों वनवासियों के वस्त्र पहनकर अयोध्या से रवाना होते हैं तो महाराजा दशरथ बहुत बुरी तरह से चीखते चिल्लाते और विलाप करते है। अयोध्या के लोग भी रोते बिलखते हुए श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ वन जाने की जिद करते हैं। श्रीराम, सीता और लक्ष्मण अयोध्यावासियों को सोया हुआ छोड़कर आगे घने जंगलों में चले जाते हैं। जब अयोध्यावासी सो कर उठते हैं तो श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को अपने बीच नहीं पाकर रोते हुए वापस अयोध्या लौट आते है। श्रीरामलीला के कलाकारों के इस भावपूर्ण दृश्य पर माहौल नम हो जाता है। दर्शकों ने तालियां बजाकर वृंदावन से आये श्री रामलीला के कलाकारों के अभिनय को खूब सराहा। इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष ओपी पारीक, कोषाध्यक्ष व सचिव राजेश वर्मा, सह सचिव प्रवीण फुटेला, प्रेस प्रवक्ता सुभाष चौहान, कला मंच के अध्यक्ष सुखराम वर्मा, सुल्तान शर्मा, देवेंद्र गोयल, त्रिलोक जोशी, मुरारी जसरासरिया, मुकेश ग्रोवर, साहिल प्रजापति, श्यामसुंदर परिहार, धर्मवीर धोकरवाल, सोनू बत्तरा, मनीष मक्कड़, अंकित जिंदल, नवशेर मान, टीकम चोटिया व चांद माही सहित अन्य कई गणमान्य जन भी उपस्थित थे।
